DPDP एक्ट पर सरकार के खिलाफ 21 मीडिया चैनलों की लड़ाई: वीडियो का दावा
मैं शर्त लगाकर आपको यह बात कह
सकता हूँ कि यह खबर आज के Prime Time
पर नहीं दिखाई
जाएगी। असल में
भारत के 21 बड़े Media Channel
सरकार के खिलाफ case करके लड़ाई लड़ रहे हैं और इसमें अडानी का
NDTV और अंबानी का News18 भी
शामिल है। यानी अडानी अंबानी के
Channel सरकार के खिलाफ Court
में case लड़ रहे हैं। लेकिन Mainstream
Media Channel अपने
Prime Time की Screen पर आकर यह
सच आपको नहीं बताएंगे। वहां
पर ये सरकार की चालीसा ही पढ़ते
दिखेंगे। असल में सरकार एक Act लेकर आती है
जिसका नाम है DPDP Act. इस Act
के अंदर सरकार ऐसे नियम बना रही
है जिससे RTI का अधिकार तो खत्म ही हो जाएगा। उसके साथ-साथ अगर कोई आप
खुफिया Investigative Report करना चाहते हैं तो
उसके लिए आपको पहले Permission
लेनी पड़ेगी। यानी आप पहले बता
दीजिए कि हम आपकी जांच करना चाहते हैं
ताकि सामने वाले को मौका मिल जाए छुपने का। अभी तक यह तमाम
Mainstream Media Channel 30 दिन
पहले Content Creators
को और Independent
Journalists को ज्ञान दे रहे थे कि ईमानदारी
से पत्रकारिता कैसे की जाती
है। Content Creators तो Journalist
हैं ही नहीं। जब यह सवाल उठा रहे थे कि भारत
में पत्रकारिता और Freedom
of Speech खतरे के भीतर
है। लेकिन आज जब
नंबर इनकी दुकान बंद होने का
आया, इनके धंधे के ऊपर खतरा मंडराया
तो ये सब एक हो गए।
ये 21 Channel मिलकर के सरकार
के खिलाफ Court के भीतर तो
लड़ेंगे और सरकार के नियम का विरोध भी
करेंगे। लेकिन TV Channel की
Screen पर आकर ये आपको सच नहीं
बताएंगे कि सरकार कैसे
पत्रकारिता का गला घोंट
रही है। यह ऐसा इसलिए नहीं करेंगे
क्योंकि इससे मिलने
वाला पैसा रुक सकता है। Subsidy
रुक सकती है। कुछ
पत्रकारों की तो Channel
से छुट्टी भी की जा सकती है। वो
तमाम Channel जो आज खतरे
में हैं, वो कल भी खतरे में थे और आने वाले Future
में भी खतरे में
ही रहेंगे। लेकिन वो अपनी Screen
पर सरकार के खिलाफ एक शब्द नहीं
बोलेंगे। इसीलिए मैं आपको कहता हूँ कि Independent
Journalist, Independent Media
संस्थान Social Media पर काम करने
वाले Journalist को Follow करिए ताकि
सच आप तक पहुंचे। आज देश के तमाम
बड़े Channel जिन्हें बड़े-बड़े
उद्योगपति चलाते हैं, वो भी सरकार
के खिलाफ Court में अपना case
लड़ रहे हैं।
फिलहाल Supreme Court ने इस Act पर रोक
लगा दी है और कहा है कि इसके बारे में
विचार किया जाएगा। लेकिन
सरकार कुल मिलाकर चाहती है कि पत्रकारिता का
गला घोंट दिया जाए।
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