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ठीक है, 1955 में से लेके 1995

तक आपको दिखेगा मुसलमान वापस भेजे गए। property सब पी गई।

लाखों भाई एक दो case नहीं है। लाखों को वापस

भेजा गया कि तुम्हारा चचेरा भाई जाओ। भले चचेरा भाई हो तुम्हारा। ठीक है।

त्रिपुरा से मुसलमानों की आबादी खाली कराई गई। ये सब census का data

है। Congress की हुकूमत में ठीक है तो उसमें यही आते आ रहा

हूँ। अगर अक्सरियत आपके साथ हो तो उसमें

इत्मिनान रखिए आप लोग। ठीक है, इसमें उस शबहे की जरूरत नहीं

कि क्यों नहीं आ रहा? क्यों नहीं आ रहा? क्या हम nationalism बोलेंगे आ जाएगा?

क्या हम constitution बोलेंगे नहीं। कुरान में है कि जब तक उनकी हर बात का इत्तेफाक

नहीं करोगे, नहीं आएंगे। शैतान है भाई, इस चीज को याद

रखेंगे। ठीक है, अब हुआ ये कि हमारा plan of action क्या

होना चाहिए

कि हम लोग चेनीओ के बच्चे हैं सौ दो सौ। उसने चेनी नाम से

platform बनाया ताकि हम लोग मिल सकें। दो हफ्ते से यही कर रहे हैं। हमारी

ख्वाहिश और हमारी आरजू यह है कि दिल्ली में चक्का जाम हो। और

सिर्फ दिल्ली में नहीं,

बाकी हर जिस शहर में मुसलमान कर सकता है। मुसलमान हिंदुस्तान

के पांच सौ शहरों में चक्का जाम कर सकते हैं। ठीक है,

अब उसमें road block कौन है? road block भाजपा नहीं है। road block

Congress नहीं

है। road block है। जमीयत उल उलेमा ए हिंद।

road block, road block है जमात ए इस्लामी।

ये ठीक है। ये लोग हैं road block। आप नाम ले लीजिए। हजार उदीन आप

छक्के पयाना पढ़ रहे हैं आप। तो road block कौन है ये समझ लीजिए।

क्या मुसलमानों में इतनी हैसियत भी नहीं कि उत्तर भारत के शहरों को बंद

किया जा सके। बताइए आप? है, है, है

बिलकुल। बिलकुल। कई बात repeat कर

दूँ। UP में शहरी आबादी मुसलमानों के तीस per cent से ऊपर है।

अरे भाई शर्म करो। तीस per cent से भी शहर चल क्यों रहे

हैं? दूसरी चीज बिहार का जिला से मैं आता हूँ।

यही आबादी छह per cent

है। शहरी आबादी 24 per cent है। अब समझ में आ रहा है

हिंदुस्तान का मुसलमान शहरी है,

शहर में रहता है। शहर बंद कीजिए और

जो किसी और रास्ते पर ले जाए उसको तर कीजिए, उसको

भगाइए। तुम हमारे नुमाइंदे नहीं हो। तुम हमारे हक में नहीं सोच रहे

हो। एक और नमूना दूंगा सतरंग लोगों का। नरेंद्र

यादव जी के साथ बैठे थे कुछ दिन पहले हमने। वो अकेले नहीं है। ये

मुसलमानों में भी है, हर भी है हर जगह। हमने कहा हमें

चक्का जाम करना है। हम पचास हज़ार लोग road पे ले आए। किसी

तरह मुसलमान, मुसलमान जवाब दे। कुरान में है ना। अगर

तुम्हारे घर से कोई

निकाले तुमको, तो उससे लड़ो और उसको उसके ही घर से निकालो।

है कि नहीं?

है। हमने कहा हमें पचास हज़ार लोग road

पे चाहिए। मुसलमान बताओ वो क्या बोलते हैं। नहीं नहीं नहीं, इससे

बेहतर होगा दस हज़ार हिंदू और दस हज़ार मुसलमान हो।

बेवकूफी देख रहे हो आप। बेवकूफी नहीं है, ये बदमाशी है। इनको पता है ये नहीं

होने वाला।

इनको पता है कि जब तक मंच पर जाओ नेता इनको गांधी बनना है,

हमको नहीं बनना है। बिल्कुल नहीं, नहीं बनना है। कोई कानून के खिलाफ काम कर

रहा है।

समझ लीजिए हमको कोई constitution नहीं बदलवा है। ये दिमाग से निकाल दीजिए।

insecurity, inferiority complex, ये एहसास कमतरी

कि हमें उनका approval चाहिए। अरे उनके approval का नतीजा देख रहे हो तुम लोग।

क्या हुआ है सत्तर साल में? दिख रहा है approval

है। और एक और चीज मैं add कर दूं कि जो आजकल fascism fascism के नज़ारे लग

रहे हैं तो याद रखिएगा कि दस्तूर शुरू से fascism

की इजाजत देता है। बिल्कुल, बिल्कुल। चाहो protection

हो, president rule हो, चुनाव का तरीका हो,

हिंदू का definition हो। ये constitution fascist है।

बिल्कुल। आप इसका सहारा लें court में, case में हर जगह

लें। लेकिन ये आपका, ये आपकी आखिरी उम्मीद हो ही नहीं सकता

क्योंकि इसने बारहा आपको fail किया है, नहीं एक बार fail किया है। भाई

नेहरू ने ही दिखा दिया constitution में कमाल। अब्दुल्ला को arrest किया। केरल में

सरकार गिराई। पढीपुर पर हमला किया। fascism और क्या

होता है जरा बताइए मुझे। कश्मीर से धोखा किया। fascism बताइए क्या

होता है? Central government चुनी हुई सरकार को बिना

किसी बात के suspend

करे। यही fascism है। बिल्कुल, बिल्कुल। इस बात को

दिमाग में डाल लीजिए। constitution का नातक मामला है। हमें पूरा इस्तेमाल

करना है। constitutionality का नाटक मामला है। वो तो हम

हैं। constitutionality अलग चीज है। constitution अलग

चीज है। याद रखिएगा constitutionality का मतलब हम property

नहीं जलाएंगे। ठीक है। हम लोगों को नहीं मारेंगे। ठीक

है। अरे भाई, हम disrupt तो कर सकते हैं। बिल्कुल,

बिल्कुल।

एक छोटी सी चीज disrupt करना कौन सा मुश्किल काम है। उसके लिए organise

होना है। ये जो आज हुआ, ये एक चिकगारी थी। इसमें चार हज़ार लोग,

तीन हज़ार लोग थे। अगर ये organised way में हो, और लोग आएंगे

क्योंकि ये तो थोड़ा जल्दी हुआ है। आपको भी पता है, तो

अगर यही एक हफ्ते बाद जुमा को रखा जाए। आपको भी पता है और लोग आएंगे

क्योंकि खबर पहुंचेगी। हम ही लोग मस्जिद पर चढ़ बात रहे हैं। वसाजी को पिछले दो हफ्ते

से और अभी बांटते रहेंगे। जुमा में, असर में, मगरिब में हर वक्त

बंटेगा। शाबाश।

अब अच्छा एक और बात ये फौज सही है कि वो हमें हिंदुओं के

बनिस्बत ज्यादा मारेंगे।

इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन ये भी याद रखिएगा कि हमें

असम के बनिस्बत कम मारा जाएगा क्योंकि ये दिल्ली है।

अगर आपको ये समझ में नहीं आ रहा तो बहुत अफसोस की बात है। देश की

राजधानी। जो लोग गुमराह कर रहे हैं, अभी दिल्ली है भाई।

ये flyover गिरेगा, पूरी दुनिया को खबर होगी।

समझ रहे हैं ना? तीसरी चीज कि भैया लाठी खाने से डर है।

बिल्कुल बिल्कुल। अगर किसी का हाथ टूटा है तो अलग बात है।

पैर टूटा है तो अलग बात है। गर्दन कटेगी। लाठी खाने

से डर है। tear gas से किसी को allergy हो सकती है तो भागे। सही बात

है। लाठी से allergy नहीं है। लाठी तो चार तो पड़ेगी।

लाठी खाने की कला भी सीख लें।

समझ रहे हैं ना कि किस तरह कम चोट पड़े, impact कम हो। पहन के क्या आना

चाहिए। समझ रहे हैं। एक पट्टा हो बीच में। जब तक ये सब

नहीं करेंगे।

हां भाई भाई। जब तक ये सब नहीं करेंगे, सारा पे ऐसा रहेगा।

ये चिंजारी कहां जाएगी? आग कैसे लगेगी?

आग लगाने के लिए दो काम करना होगा। लाठी खाने के लिए तैयार रहना होगा,

नंबर one। नंबर दो organise होना होगा। अगर आपकी सारी शक्ति में

disrupt करना है तो हमको तो organise होंगे। भले ही हम पांच लोग से शुरू

करें। ये पार्टियां भड़ में जाए। बिल्कुल।

कि जनता मंतर को जमा होकर रोना जाना करते रहो।

आपको तो टूट में जवाब दीजिए, इससे कुछ हासिल नहीं होगा।

अगर आप हमारे यहां आ रहे तो आइए याद रखेंगे हम। ठीक है

ना? नहीं तो देखा जाएगा। ये है सब। तो मेरी

जामिया

के सारे तलबा से ये गुजारिश है कि organize हो जाए।

आइसा के भरोसे ना रहे। आम आदमी पार्टी, आम आदमी पार्टी के भरोसे ना रहे।

कैसे? कैसे? कांग्रेस और भाजपा में फर्क करना छोड़ दे।

बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। आप लोग याद रखेंगे। आप

लोग। अब करना क्या है? जो बातें मैंने बोली, आप अपने hostel में बोलिए

कि हमें चक्का जाम करना है, ठीक है। हर hostel, हर मोहल्ला,

हर जहां जहां student

रहते हैं। यार मुझे जामिया के बारे में पता नहीं। जहां जहां student रहते हैं,

आप एक नुमाइंदा सामने कर सकते हो जो इस बात पे मुत्तहिद है ये लोग

और ये नुमाइंदा है कि हमें चक्का जाम करना है। आप लोग खुद group बनाइए ना भाई,

group बनाइए और इसमें कोई बन मुटाव नहीं होना। वो नहीं सुनेंगे हमारी।

ठीक है, कोशिश करो। इसमें ideological कोई बात नहीं

होनी है। इसमें बात होनी

है चक्का जाम की। और कौन तैयार है और कौन नहीं, दो

ही बात है भाई। कौन तैयार है, कौन नहीं है। जो तैयार है वो जमा

कीजिए। ये आप लोग करना होगा यार। leader पैदा थोड़े होता है।

अभी कल ही किसी दोस्त ने मुझे पढ़ाए। इकबाल अहमद का एक quote था। इकबाल अहमद बिहार से

पाकिस्तान हिजरत किए थे। 1947 में बच्चे ही थे। वो partition की

कहानी लिख रहे कि कारवां हमारा निकला। UP में कहीं से और लाहौर जाना था।

शुरुआत में एक अफीम खाने वाला, जो कि अफीम को लेकर परेशान

बैठा था कि हमको कोई अफीम दे दे। वो पहले तीन दिन अफीम ढूंढ रहा

था। ठीक है। इकबाल अहमद लिखते हैं कि सातवें दिन तक

कारवां को lead कर रहा था और अफीम को भूल चुका था। और क्या क्या हुआ?

कोल्더라 आया, लोग मारे गए। रास्ते में पंजाब में मारा।

पता नहीं कहां कहां मारा। इस बात को याद रखिएगा leader कहीं से आ सकता है। ये लोग

ये दलाल हैं, ये leader नहीं है। leader हालात पैदा

करता है। बस आपको ईमान से काम करना है। बेशक। एक

दूसरे से। एक दूसरे से ये करने

में जब आप party के पीछे जाएंगे, अल्लाह जानता है, कुछ हासिल नहीं होने

वाला है। मेरी बस एक गुजारिश है। यही बात मैंने पहले कही थी और repeat कर

रहा हूं कि आप लोग organize हो जाइए। hostel department जो आपको समझना है, ये

आपकी university है। लेकिन goal क्या है?

हम चक्का जाम करना चाहते हैं। हम दिल्ली के मोहल्ले में दूध बंद करना चाहते

हैं, पानी बंद करना चाहते हैं। खुल के बोलिए यार,

देश छोड़ दे। अब आपको पता

है कितने लोग 55 हज़ार तो detention camp में हैं। मुझे पता नहीं मुसलमान

कितने नहीं हैं। 55 हज़ार हैं। जामिया 28 हज़ार। हो जाए arrest 28

हज़ार। भाई इंसान की जान की कीमत बराबर है कि अलग है अलग है। बराबर

है। इस पर ध्यान दीजिए थोड़ा। असम जल रहा है। यहां कुछ

कीजिए। बस मैं इसी बात खत्म करूंगा। एक शेर है जो मैं पढ़ दूंगा।

46 में बहुत हमला हुआ मुसलमानों पर। 46 में बिहार में बहुत हमले हुए। 2 हज़ार

देहाती को खत्म कर दिया। उस पर एक शेर जो अखबारों में बार बार आता था,

कुछ दिनों से मैं लगातार repeat कर रहा हूं। यह है कि इस्लाम की फितरत में

कुदरत ने लचक बख्शी। इस्लाम की फितरत में

कुदरत ने लचक बख्शी।

इतना ही ये उभरेगा, कितना कि दबाओगे।

अल्लाह हु अकबर।

तकबीर अल्लाह हु अकबर।

End of transcript · 1,757 words

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