केरल में अमृत सिंह नरेन की FIR और काशी आर्ट कैफे विवाद
जिस level पर Kerala में Hindu phobia बढ़ता जा रहा है, उस हिसाब से वो दिन
दूर नहीं जब हिंदुओं को बोलने से पहले भी police की permission लेनी
पड़ेगी। Recently blogger अमृत सिंह नरेन ने अपने video में
Fort Kochi के Kashi Art Cafe को लेकर सवाल उठाया कि
जिस cafe का नाम हिंदुओं के पवित्र शहर काशी पर रखा गया है,
वहां beef क्यों परोसा जा रहा है। उन्होंने cafe में महात्मा
गांधी और भारत के बंटवारे वाले Islamist मोहम्मद अली जिन्ना को
साथ दिखाने वाले artwork पर भी concern दिखाया। इतना ही नहीं, अमृत ने
अपने video में बताया कि Fort Kochi में लगभग 95%
business owners, taxi और auto rickshaw drivers, छोटे
दुकानदार और street vendors Muslim community से हैं और यहां के
हिंदू local residents अपने political views खुलकर रखने
से डरते हैं। अब इनमें से कोई भी बात ऐसी नहीं थी जिससे कोई दंगा
भड़के या फिर किसी की भावनाएं आहत हों। अमृत ने जो देखा वही
कैमरे पर बता दिया। लेकिन केरल की Congress सरकार को इससे
समस्या हो गई। पहले इस्लामी कट्टरपंथियों ने अमृत को निशाना
बनाया और अब केरल की police ने उनके खिलाफ BNS की section
353 और 192 के तहत FIR दर्ज कर ली। सिर्फ
यही नहीं बल्कि जिन्ना की photo की आलोचना करने पर FIR का ऐलान
खुद केरल के CM V.D. Sateesan कर रहे हैं और वह इसे communal
hatred बता रहे हैं। यह वही CM V.D. Sateesan हैं जो दो दिन
पहले केरल की Indian Union Muslim League को justify कर रहे
थे। वही IUML जिसके link भारत का बंटवारा करने वाली
जिन्ना की Muslim League से है। हालांकि केरल में Communist हो या Congress,
दोनों एक ही सिक्के के पहलू हैं और लगातार हिंदुओं को निशाना बनाते
रहे हैं। 2018 में सबरीमाला की धार्मिक परंपरा बचाने
के लिए श्रद्धालु सड़कों पर उतरे तो कई लोगों को गिरफ्तार कर दिया गया
था। विवाद यहां तक पहुंचा कि भगवान अयप्पा के भजन गाने पर लगी
पाबंदियों के खिलाफ High Court को दखल देना पड़ा। Court ने साफ कहा
कि section 144 के नाम पर श्रद्धालुओं को समूह में
दर्शन करने और भगवान अयप्पा के भजन गाने से नहीं रोका जा
सकता। अब सवाल केरल सरकार से है कि आखिर कब तक वो
secularism की आड़ में Hindu rights को लेकर उठ रही चिंताओं
को नजरअंदाज करते रहेंगे?
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