बनारस घाट पर बाबा की सलाह: मां की सेहत के लिए जगन्नाथ पुरी में सेवा
बनारस के घाट पर बैठा हूं मैं अभी। अभी just आरती खत्म हुआ और मैं side में आके बैठा
तो मेरे side से एक बाबा जी मुझे दिखे। तो मैंने उनको बोला कि बाबा जी हर हर
महादेव। मैंने खुद से ही बोला उनको। तब वो मेरे को बोलते हैं और बेटा तेरे गले का घाव
कैसा है? मेरे गले में एक घाव है जो बचपन में लगा था।
पटाखे से जल गया था मेरा गला
तो उसी वजह से लगा था। वो मेरे को बोलते हैं तेरे गले का घाव कैसा है?
अब मुझे पहले यह लगा कि शायद उन्होंने देख लिया होगा, इसी वजह से उन्होंने पूछा।
मैं फिर उन्हें कुछ बोल मतलब बोला। उसके बाद वो मेरे को बोलते हैं
कि माताजी की तबीयत खराब है। इसी वजह से बहुत परेशान चल रहा है तू।
अब मेरा दिमाग खराब हो गया। literally अब मेरा दिमाग literally घूम गया। मैंने उन्हें
कुछ भी नहीं पूछा। उसके बाद कि आपको कैसे पता वगैरह वगैरह। कुछ नहीं। मैंने
बस, मैंने बस उनसे एक ही सवाल पूछा कि आपको जब
पता है
कि परेशान चल रहा हूं तो परेशानी का हल भी बता दो आप मुझे। तब वो मेरे को
बोलते हैं। परेशानी का हल एक ही है। तेरे गले का घाव जो है, उसमें
कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। वो अपने आप सही हो जाएगा। अगर माताजी का तबीयत सही
करना है तुझे तो 33 दिन के लिए जगन्नाथपुरी में चले जा। वहां पर जाकर
33 दिन रह मंदिर में सेवा कर। वहां पर सब कुछ सुख सुविधा
से दूर रह के 33 दिन मंदिर में रह और मंदिर में जो भी आएंगे
भगवान की सेवा कर, जो श्रद्धालु आएंगे उनकी सेवा कर और 33 दिन
बाद
ये चीज देखना अपने आप तबीयत सही होना start हो जाएगा। अब ये बोलने के
बाद वो चले गए यहां से और मैं तब से यहां पर बैठा हूं। मैं बैठ कर सोच रहा हूं कि मुझे
करना क्या चाहिए।
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