Transcript · Arabic → Hindi
Religious Commentary on Current Times
फितने के वर्षों और
तुम पर सहाबा की सहनशीलता ने तुम्हें धोखे में रखा,
यहाँ तक कि तुम उम्मत पर स्थायी आफ़त बन गए।
तुम मुसलमानों को काफ़िर ठहराते हो और उनका खून बहाना जायज़ समझते हो
और उनकी इज़्ज़तों को भी, बिना किसी हक़ के।
लेकिन आज तुम एक दूसरे दौर में हो।
ऐसा दौर, जिसमें तुम पर ज़ुल्म नहीं होता।
ऐसा दौर जो फ़ाजिर के लिए कठिन और मुसलमान के लिए आसान है,
जो शुक्रगुज़ार है।
ऐसा दौर, जिसमें तुम्हारे लिए न जगह है, न बच्चे,
न दोस्त और न भाई।
अमीरुल मोमिनीन का दौर।
End of transcript · 97 words · machine translated
Original transcript (Arabic)
غرتكم سنيات الفتنة وحلم الصحابة عليكم حتى أصبحت بلاء مقيما على الأمة. تكفرون المسلمين وتستبيح دماءهم وأعراضهم دون وجه حق.
ولكنكم اليوم في زمن آخر. زمن لا تساء فيه. زمن صعب على الفاجر وسهل على المسلم الشاكر. زمن لم يعد لكم فيه مكان ولا أطفال
ولا صديق ولا إخوان. زمن أمير المؤمنين.