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Personal reflections on visiting Varanasi
12年後、夫がこの場所の
思い出を語るのを聞いて
私もヴァーラーナシーに来たいと 思いました。
自分でここに来て、このすべてを
自分の目で見たかったのです。
今日、その願いが叶いました。
とても嬉しいです。もし夫が
今日、生きていたなら、自分の名を 冠した
この小さなゴクルをとても誇りに 思ったでしょう
そして。
国中の人々と同じように、私もそこ へ行き
本当に、夫は今日必ずここに
来ていたと思います。しばらくの間 、私はこうしたことを考えて
いました。今
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Original transcript (Hindi)
बारह दो साल बाद जब मेरे पति इस स्थान की यादें सुनाते थे तो उनके अनुभवों को सुनकर मेरे मन में भी वाराणसी आने की इच्छा हुई। मैं चाहती थी कि मैं खुद यहां आऊं और इन सब चीजों को अपनी आंखों से देखूं।
आज मेरी वो इच्छा पूरी हुई है। मुझे बहुत खुशी है। अगर मेरे पति। अगर मेरे पति आज जीवित होते तो अपने नाम पर बने इस छोटी सी गोकुल के पर वे बहुत गौरव होते और।
और सारा देश जैसा मैं भी वहां जाता और सच में मुझे लगता है कि वे आज यहां जरूर आते। कुछ समय से मैं यही सब सोच रही थी। अब