Transcript · Hindi

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1993 में।

हरिओम नरेंद्र!

बिल्कुल याद है। तुम February 1993।

हरिओम नरेंद्र!

बिल्कुल याद है। तुम February 1993

में बड़ौदा आए थे। तुम मुझे शिकागो में होने वाली विश्व धर्म

संसद की शताब्दी के आयोजन में आमंत्रित करने आए थे।

मेरा सौभाग्य था

कि मुझे आपके दर्शन करने का अवसर मिला

और

आज मैं चाहूंगा

जिस कार्य के लिए मैं लगा हूं,

आपके आशीर्वाद मिले।

उस समय।

मैंने उस समय तुमसे कहा था कि अब मेरी उम्र हो गई है।

यह बूढ़ा और बीमार व्यक्ति इतनी बड़ी जिम्मेदारी नहीं उठा

सकता। अब हिंदू युवाओं को यह जिम्मेदारी संभालनी

होगी। उसी वर्ष July में मैंने आयोजकों को भी

यही बात लिखी थी।

मैंने लिखा था कि हमारा सनातन धर्म सत्य के एक

भव्य प्राचीन मंदिर की तरह है। उसकी नींव बहुत

मजबूत है, लेकिन सदियों से उसकी उपेक्षा हुई। अब

उसके गिरे हुए स्तंभों को फिर से खड़ा करना हमारा काम है।

इसके लिए हमें भीड़ की जरूरत नहीं। हमें हर जिले में

प्रेरित युवाओं के छोटे छोटे समूह चाहिए जो पूरे

उत्साह और दृढ़ संकल्प के साथ काम करें।

हर समुदाय को अपने प्रयासों से आगे बढ़ना होगा। कोई भी यह

सोचकर बैठा नहीं रह सकता कि एक बूढ़ा व्यक्ति आएगा और

कोई चमत्कार कर देगा। और आज भारत को देखो।

मुझे बहुत खुशी है कि 1993 में जिस व्यक्ति

से मेरी मुलाकात हुई थी, आज वही भारत का

माननीय प्रधानमंत्री है। तुम हमारे मंदिरों के

पुनरुद्धार, शिक्षा व्यवस्था में बदलाव, अर्थव्यवस्था

को मजबूत बनाने और अदम्य शक्ति तथा साहस के

साथ चुनौतियों का सामना करके मेरी परिकल्पना को

साकार कर रहे हो। तुमने भारत के लिए जो कुछ किया है,

उस पर हम सभी को बहुत गर्व है। उस स्तंभ फिर से खड़े हो रहे

हैं। इसलिए माननीय प्रधानमंत्री जी, गीता का

संदेश हमारे युवाओं तक पहुंचाइए।

यही विकसित भारत की नींव बनेगा। जैसा मैंने उस

समय लिखा था, हमें यह लक्ष्य हासिल करना ही है। हम

इसे हासिल कर सकते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं। हम

इसे हासिल करके रहेंगे।

गुरुदेव,

आपका एक एक शब्द मेरे लिए मंत्र है।

आपकी एक एक बात मेरे लिए आशीर्वाद है

और मुझे बराबर याद है

कि उस समय भी

आपने मुझे

युवा शक्ति से संबंधित बहुत कुछ करने के लिए

आदेश दिए थे। मेरी कोशिश है कि मैं इन

चीजों को करता रहूं। आपके आशीर्वाद ही मेरे लिए बहुत

बड़ी बात है।

मैं सभी ऋषियों का आशीर्वाद तुम्हारे लिए प्रार्थना के रूप में मांगता

हूं।

माननीय प्रधानमंत्री जी,

याद रखना, शिखर पर व्यक्ति अकेला होता है।

और एक बात मैंने भक्तों से कहा है कि तुम्हें

प्रसाद के रूप में श्रीखंड दें,

उसे जरूर खाना।

यह मत कहना कि आज तुम्हारा उपवास है।

गुरुजी आपकी बात सही है। अभी भी नवरात्रि के मेरे उपवास पूरे

हुए हैं।

लेकिन

जब बड़ौदा में मैं आपके साथ बैठा था,

उस दिन भी आपने मुझे श्रीखंड खिलाया था और खुद ने भी

खाया था।

और आज आपको पूरी बात याद है।

नहीं नहीं।

और इसलिए

मैं आपको प्रणाम करते हुए

आपने जो मुझे आदेश दिया है,

मुझे वह प्रसाद के रूप में मिलना मतलब मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है।

मैं जरूर प्रसाद का ग्रहण करूंगा। फिर

एक बार आपके आशीर्वाद के लिए गुरुदेव, मैं आपको बहुत

बहुत

प्रणाम करता हूं और आपके बताए मार्ग पर

चलने का भारत पूरी तरह प्रयास करेगा।

यह तुम्हारा स्नेह है नरेंद्र। प्रसाद ग्रहण करो

और याद रखो,

जो काम तुमने अपने हाथों में लिया है, वह भारत

का काम है। भारत तुम्हारे साथ है और

तुम उसके साथ हो।

गीता का संदेश, युवा शक्ति का जागरण, हमारी

परंपरा का पुनरुद्धार ये सब तुम्हारे द्वारा हो रहा

है।

मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है हमेशा। हरि

ओम। हरि ओम गुरुदेव!

End of transcript · 610 words

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