Reflections on National Sacrifice
हम भगत सिंह और चंद्रशेखर के चरित्र पढ़ के कभी नहीं सोचा कि
राष्ट्र के लिए कभी मुझे भी अवसर मिले कि हम अपने प्राणों को बलिदान करें। हम
ऐसे निकृष्ट लोगों को देखकर क्यों मन चलाएं?
हम उच्च लोगों को देखकर मन चलाएं कि काश हमको भी कभी राष्ट्र
के लिए प्राण समर्पित करने का अवसर मिले कि वंदे मातरम
फांसी पर चढ़ गए। कभी हमको भी राष्ट्र के लिए छाती में गोली
खाने को मिले।
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