Emotional Journey of an Olympic Athlete
तो मिरा भाई तीन बार आप
लगातार इतने आँसू टपक रहे थे
मुझे लगता है कि आँसू के हर बुन से
जैसे गोल्ड बेडल टपक रहा है
मैं बहुत ज़्यादा खुशी थे, इमोस्णेन भी थे
उससी दिन खुशी ज़्यादा था,
और मैं इसलिए रोई थी कि
मेरा पेरिस ओलिंपिक में,
मेरा एक कीजी में मेदल रह गई थे
और एक प्लेयर्स की लाइफ में
क्या-क्या हमको फेस करना पड़ते है
तो ये चार शाल की अंदर
मैं क्या-क्या कुछ मैंने फेस किया था
हर टाइम इंजूरी ही चल रहे थे,
और फैमिली प्रॉबर्म, वो सब हो रहा था
तो बहुत मुश्किल से मैं ये चार शाल फेस किया था
तो वो सब, जब पोडियम में मैं खरित थे सर,
और हमारी जो फ्लेक उपर जाते है
और हमारी नेस्टिन एंटेम जब बजते हैं,
तो हम रुप नहीं सकते हैं सर
अपना आप आशो निकलते हैं
बहुत-बहुत बढ़िया
End of transcript · 150 words