Protests Against Development Projects in Panna
"न्याय दो या मार दो" इस नारे की गूंज इस बार मध्य
प्रदेश के छतरपुर से नहीं बल्कि पन्ना जिले से
उठी है। मेरे पीछे आपको दिखाई दे रहा होगा कि एक बार
फिर से सांकेतिक चिता और सांकेतिक फांसी
आंदोलन किया जा रहा है। लेकिन इस बार यह आंदोलन केवल
केन बेतवा लिंक परियोजना तक सीमित नहीं है। बल्कि
पन्ना जिले में चल रहे मझगांए मध्यम सिंचाई परियोजना
और सिंगरौली ललितपुर रेलवे परियोजना के खिलाफ पन्ना जिले
में एक आंदोलन चल रहा है। इनका आरोप है कि इन
परियोजनाओं के बाद सरकार ने ना तो इन्हें उचित तरीके
से मुआवजे का भुगतान किया और ना ही इनके विस्थापन
की कोई नीति बनाई गई। और विस्थापन की नीति और
मुआवजे की मांग को लेकर ये लोग लगातार ये आंदोलन कर रहे
हैं। केन बेतवा लिंक परियोजना समेत इन तमाम परियोजनाओं के खिलाफ
यह तीसरी बार आंदोलन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का यह
आरोप है कि प्रशासन हर बार इन्हें झूठी तसल्ली
देकर आंदोलन खत्म करने को कहती है, लेकिन अभी तक इनकी
जो मांगे हैं वो पूरी नहीं हुई हैं। आइए आंदोलनकारियों से
बात करते हैं और जानने की कोशिश करते हैं कि क्यों तीसरी बार
इस तरीके से चिता आंदोलन किया जा रहा है। अभी हमारे
साथ सामाजिक कार्यकर्ता और जय किसान संगठन के संस्थापक अमित
भटनागर जी हैं। अमित जी मेरा आपसे यही सवाल है कि इस बार जो यह
आंदोलन चल रहा है, यह किन-किन परियोजनाओं के खिलाफ है?
दरअसल केन बेतवा लिंक परियोजना है। इसमें भयंकर
पर्यावरणीय विनाश हो रहा है और हमारा सरकार से
यही कहना है कि परियोजनाओं पर अ-चर्चा हो
कि परियोजनाएं लाभदायक हैं या नुकसानदायक। उनके लाभ ज्यादा है या नुकसान
ज्यादा है। जो अभी मझगांए डैम है, रुंज डैम है,
जिनमें किसानों की जल, जंगल, जमीन, उनके मकान सब कुछ छीना जा रहा है।
माने परियोजनाएं जिनके त्याग पर टिकी हुई हैं लेकिन उनको
न्याय नहीं दिया जा रहा है। मझगांए डैम है, जहां पर लोगों की
जमीनें, उनके गांव, उनके जंगल सब कुछ अधिग्रहित किए गए हैं।
लेकिन
यहां पर ना तो कानून का पालन किया गया। सामाजिक समघात
Report जो होती है, जिसमें Social Assessment होता है कि भाई
लोगों
को क्या-क्या उनका जंगल जा रहा है, उनकी जमीन जा रही है, क्या-क्या किस तरह से
आजीविका ये सब impact जो होता है। ये सब नहीं हुआ। इसी कारण है कि ये नहीं
हुआ तो लोगों की जिनकी सिंचित थी, उनकी जमीनों को असिंचित कर
दिया गया। जो अपात्र लोग हैं उनको चढ़ाया जा रहा है क्योंकि यहां भ्रष्टाचार का एक
खुला खेल हो रहा है। यही एक परिणाम है कि आज आप देखिए कि
पूरा गांव, पूरा घर डूब रहा है और इस एक सिर्फ गांव और
घर नहीं डूब रहा है। ये हमारे देश के संविधान को भी डुबोया जा रहा है।
हमारे अधिकारियों की और सत्ता दल के जो नेता हैं उनकी इंसानियत भी
डूब रही है।
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