Discussion on Legal Rights and Court Access
तो हम लोग यहां मिलने के लिए क्या कहेंगे आप?
नहीं, देखिए मैंने उनका, मेरे को कल लेटर मिला था। मैंने उसका कल रात
में ही जवाब
दे दिया है। मैं लेटर उनका परसों का है। मुझे मैं कल मैं बाहर था तो
मुझे मेरे पास वो कल लेटर मुझे मिला था तो मैंने उसका रात में उसका जवाब दे दिया
है। मैंने कुछ रीजंस उसमें दिए हैं जिसके बेसिस पर मैंने अपनी
असमर्थता व्यक्त की है कि मैं मिल नहीं पाऊंगा।
क्या रीजन आपकी तरफ से
नहीं कारण, देखिए मैं, मैं आपसे रिक्वेस्ट करूंगा कि उस लेटर
के कंटेंट आप उनसे पूछिए। मैंने उसकी कॉन्फिडेंशियलिटी मेंटेन की है।
सर रिप्रजेंटेटिव्स पार्लियामेंट के भी हैं उसमें। किस तरह से आगे अपनी
बात रखें। कल CJP भी दो दिन से जिस तरह से प्रोटेस्ट कर
रहा है।
देखिए सुप्रीम कोर्ट के द्वार सबके लिए खुले हैं। कोई भी पिटीशन, किसी भी, कोई
भी चाहे वह आम नागरिक है या कोई माननीय सदस्य है, किसी
इलेक्टेड बॉडी का कोई भी है।
भारत का हर नागरिक का उसका अधिकार है। वह हमारे पास आए। हम कानून की
व्यवस्था और कानून के
अनुरूप जो उनकी समस्या है उसका हम अपनी तरफ से उसकी सुनवाई
करेंगे और जो जिसको बनता है उसको जरूर उसका अधिकार वो देंगे।
सर एक लास्ट क्वेश्चन।
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