Controversial Views on Gandhi's Assassination
दोस्तों, गोडसे ने एक को मारा। कसाब ने दो सौ साठ
से भी ज्यादा लोगों को मारा। राजीव गांधी ने सत्रह हज़ार सिखों को मारा
और नेहरू, गांधी और जिन्ना मिलकर चालीस लाख हिंदुओं को
मारा। लेकिन
उसके बावजूद भी अगर आपको यह लगता है कि गोडसे एक आतंकवादी है तो यकीन
मानिए आप मानसिक रूप से रोगी हो चुके हैं। गोडसे ने
गांधी को इसलिए मारा क्योंकि जो गोडसे था वह यहां पर संविधान के खिलाफ
था। लेकिन यह मैं नहीं कह रहा, यह कह रहे हैं हमारे राहुल गांधी जी।
गांधी जी ने इस संविधान के लिए जिंदगी दी। उसकी हत्या
की गई। गोडसे ने गांधी जी को गोली से मारा।
गोडसे इस संविधान के खिलाफ था।
अब जरा मुझे एक बात बताओ किस हिसाब से हमने इस बंदे को vote दे। गांधी जी को मारा गया
था साल उन्नीस सौ अड़तालीस में और जो यहां पर हमारा संविधान है वह लागू हुआ था उन्नीस
सौ पचास। तो यहां पर नाथूराम गोडसे actually में किस देश के संविधान के
खिलाफ था जरा मुझे बताइए। लेकिन यहां पर नाथूराम गोडसे जी ने actually में गांधी जी
की
हत्या क्यों की? तो मैं आपको बताता हूं कि नाथूराम गोडसे ने
गांधी जी की हत्या
क्यों की। गांधी जी की हत्या के बाद जब अदालत ने गोडसे से कहा कि अपना पक्ष
हमारे सामने रखिए तो नाथूराम गोडसे जी ने पांच घंटे तक अदालत के सामने और
वहां मौजूद लोगों के सामने अपना पक्ष रखा। गोडसे ने कहा कि महात्मा गांधी
ने कभी भी एक मस्जिद में गीता पढ़ने का साहस नहीं किया, लेकिन एक
मंदिर में कुरान पढ़ने का साहस उनमें अपने आप आ गया। हालांकि यहां पर एक
बहुत ही important बात है जो मैं आपको बताना चाहता हूं कि जो गांधी जी हैं वह
अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ एक ही बार मंदिर गए थे। तो इसलिए यहां पर
मैं कहना चाहूंगा कि गांधी देश के लिए नहीं मरे बल्कि देश को बचाने
के लिए गोडसे ने गांधी जी को मारा। गोडसे अमर रहे। जय हिंद, वंदे
मातरम, जय श्री राम।
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