Innovative Education and Social Reform in Ladakh
ये आदमी तो गद्दार है यार। एक-एक करके इसकी सारी गद्दारियां गिनाता हूँ।
और फिर आपका यहाँ ये ज़मीर अगर इजाज़त दे कि हाँ इसको गद्दार लिखना चाहिए
तो लिख जाना क्योंकि बहुत से लोग लिख रहे हैं और बोल भी रहे हैं। सारी गद्दारियां गिनाता हूँ।
एक गिलास पानी अगर कोई किसी प्यासे को देता है तो हम उसे इंसान कहते हैं।
लेकिन कोई लाखों लीटर पानी देकर पूरे राज्य की पानी की कमी को ही पूरा कर दे
तो उसको क्या कहेंगे? सारा कुछ बताता हूँ।
लद्दाख का एक वैज्ञानिक जो इंजीनियर है, इनोवेटर है, एजुकेशनल रिफॉर्मर है।
पढ़ाई तो सब करते हैं लेकिन उस पढ़ाई को अपनी ज़िंदगी में प्रैक्टिकल बनाकर
इस्तेमाल कैसा किया जाता है, बंदे ने बताया।
लद्दाख की कितनी सारी परेशानियों को अपनी तकनीक से हल कर दिया।
5% बच्चे पास होते थे, एक स्कूल बनाया 1988 में और एजुकेशन को पता है कहाँ से कहाँ ले आया?
5% जहाँ पास होते थे वहाँ से
75% पास होने लगे।
हम सब जानते हैं कि लद्दाख में पानी की प्रॉब्लम है। जो बर्फ के पहाड़ होते हैं, ग्लेशियर जिनको हम बोलते हैं,
वो पिघल जाते हैं। गर्मियों में पिघल जाते हैं।
लेकिन बंदे ने आर्टिफीसियल ग्लेशियर बना दिए। मतलब आर्टिफीसियल, अपने ही पहाड़ बना दिए।
जो 10, 15, 20 मीटर ऊँचे और 10, 15, 20 लाख लीटर तक
पानी स्टोर कर लेते हैं।
तो वहाँ के गाँवों की जो गर्मियों में खेती होती है, वो इन्हीं ग्लेशियर से होती है। तो ये आदमी गद्दार है।
आइस स्तूप, ये आर्टिफीसियल बर्फ के जो पहाड़ हैं, पूरी दुनिया इस टेक्नोलॉजी को कॉपी कर रही है।
कनाडा, स्विट्ज़रलैंड, ये सब जगह कॉपी किए जा रहे हैं और इसी वजह से
रोलेक्स अवार्ड भी मिला है।
तो इतना देश का नाम बाहर रोशन करने वाला गद्दार तो है ही।
सोलर हीटेड बिल्डिंग्स बनाईं जहाँ -30 डिग्री, आप सोचते हो 0 डिग्री पे बर्फ जम जाती है,
-30 कितना होता है, कैसे रहेंगे लोग?
पैसिव सोलर बिल्डिंग्स डिज़ाइन कीं
जहाँ मतलब बिना हीटर के जिन बिल्डिंग्स में रहा जाता है।
हमारी सेना के लिए मूवेबल टेंट्स बनाए जहाँ पर ये बहुत ज़्यादा ठंड होती है वहाँ पर
इन टेंट्स में हमारी सेना आराम से रह सकती है।
तो ऐसा करने वाला बंदा गद्दार तो है ही।
2021 में HIAL, हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ़ अल्टरनेटिव्स, एक ऐसी यूनिवर्सिटी जो विदाउट डिग्री,
मतलब आओ और सीखो।
हाथ से काम करके सीखो जहाँ पर किताबों से नहीं, प्रॉब्लम सॉल्व करके सिखाया जाता है।
उन्हें पता है कि एजुकेशन सिर्फ रट्टा मारने का नाम नहीं है, एजुकेशन हाथ से काम करके सीखने का नाम है
और हाथ से काम करके सीख के गाँव के बच्चे भी इंजीनियर बन सकते हैं।
अब इतना सारा कुछ कोई देश के लिए करेगा तो गद्दार तो है ही।
अब अवार्ड्स सुनिए क्या-क्या अवार्ड्स मिले हैं। पैसे से खरीदे हुए नहीं, जो रियल अवार्ड्स मिले हैं।
मैगसेसे अवार्ड 2018, रोलेक्स अवार्ड 2016
ग्लोबल अवार्ड फॉर सस्टेनेबल आर्किटेक्चर 2017
इंटरनेशनल टेरा अवार्ड 2016
GQ सोशल एंटरप्रेन्योर ऑफ़ द ईयर 2017
CNN IBN रियल हीरोज अवार्ड 2008
अशोका फेलोशिप अवार्ड 2002
ग्रीन टीचर अवार्ड 2004
गवर्नर्स मेडल फॉर एजुकेशनल रिफॉर्मर 1996
द वीक मैन ऑफ़ द ईयर 2001
ICA ऑनर अवार्ड सैन फ्रांसिस्को 2017
इतने सारे अवार्ड जो पैसे से खरीदे नहीं हैं, मतलब कुछ तो किया होगा ना?
सिर्फ अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए, सोशल रिफॉर्मर, एजुकेशन रिफॉर्मर।
लोगों के लिए भलाई की है, अपने देश की भलाई की है।
अपने देश की इतनी सारी भलाई करने के बाद भी अगर किसी को गद्दार कहा जा रहा है तो ये,
ये सोचने वाली बात है।
अब बताइए ना, एक इंसान को, एक देशभक्त को, एक भारतीय को, मुझे, आपको, हम सबको
कितना कुछ करना पड़ेगा कि उसे देशभक्त कहा जाए?
और भी कुछ ज़्यादा करना पड़ेगा?
अब आपका जो मन कर रहा है, जो आपका दिल, आपका ज़मीर गवाही दे रहा है, वो कमेंट में लिख जाओ।
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