India's Environmental Performance Concerns
हमारी economy ऊपर जा रही है लेकिन सांस लेने लायक हवा की ranking नीचे की
तरफ क्यों जा रही है? दिल्ली की एक सुबह सोचिए। एक मां बच्चे को
school भेजने
से पहले weather नहीं AQI check करती है। बाहर धूप है
लेकिन फिर भी mask bag में रखती है। Economic growth की headlines
उसके बच्चे के लिए साफ हवा नहीं बन जाती। Yale के
EPI यानी कि Environmental Performance Index 2026 में
177, वन सेवेंटी सेवन देशों में भारत की ranking
176th है। और score कितना है 22.46।
Estonia 74.79 के साथ पहले स्थान पर है। यह किसी
एक दिन की pollution reading नहीं है। भारत environmental health
में 174th है। Air quality में 175th
है। जबकि EPI index में हमारे पड़ोसी भूटान 52nd,
श्रीलंका 94th rank पर है और India
176th। हां, यह बात सही है कि global indices जो हैं
उनकी
methodology पर सवाल उठ सकते हैं। Ranking कोई final truth नहीं
है, लेकिन लगभग सबसे नीचे अगर आप हैं तो
methodology
को दोष देना कोई accountability तो नहीं कहेगी। असल सवाल
विकास की हमारी समझ से है। क्या GDP बढ़ना पर्याप्त
है? अगर नागरिक जहरीली हवा में सांस लें,
असुरक्षित पानी पिएं और climate disaster के सामने एकदम
असहाय हों। Environment luxury नहीं है। यह
public health, dignity और equity का सवाल है।
Purifier खरीद सकने वाला और सड़क पर काम करने वाला
नागरिक प्रदूषण का एक जैसा बोझ नहीं उठाते। देश का
असली report card केवल GDP की headline में नहीं उसके
नागरिकों के फेफड़े में भी लिखा जाता है।
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