Discussion on Religious Identity and Partition
देखो यहां पर हिंदू थे, हम हिंदुओं से मुसलमान हुए हैं। अगर यहां पर
मजहबी आजादी ना
होती तो हम मुसलमान किस से हो जाते? और उधर जब हिंदुस्तान और पाकिस्तान एक
था तो बिल्कुल लेने देना एक था। शादी पे, ब्याह पे एक दूसरे
के आना जाना होता था मगर वो खत्म हो गया partition के बाद।
आपने अभी एक बात की है कि हम पहले हिंदू थे फिर हम मुसलमान
हुए। लेकिन जब इंडिया वाले ये बात करते हैं तो हमारे मौलवी
फतवे जारी कर देते हैं उनके ऊपर।
हकीकत तो यही है ना। देखो हम तो मुसलमान हुए हैं,
हिंदू से मुसलमान हुए हैं और उधर मजहबी आजादी थी तो हो गए ना। अगर मजहबी आजादी ना
होती तो हमें मार देते।
सर हम तो दो कौमी नजरिये की बुनियाद पर इंडिया से अलग हो गए।
तरक्की नहीं करने दे रहे हम मुसलमान एक दूसरे मुसलमान को।
असल में इधर हमारे कानून पे अमल राबंद नहीं है ना। कानून पे अमल हो तो हर बंदे को
तवज्जो मिलना चाहिए। कानून तो सबके लिए बराबर होना चाहिए,
इंसाफ बराबर होना चाहिए तो
सब कुछ खत्म हो जाए।
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