National Commitment and Service Pledge
हमें आज से शपथ लेकर आगे बढ़ना है
कि राष्ट्र प्रथम,
राष्ट्र प्रथम
मेरा संकल्प होगा।
राष्ट्र समृद्धि
मेरा प्राण रहेगा।
राष्ट्र की सेवा
मेरा लक्ष्य रहेगा
और नागरिक देवो भव का मंत्र
मेरी राष्ट्र आराधना साधना
का आधार रहेगा। कर्म मेरा
धर्म रहेगा। कर्तव्य पालन मेरा प्राण
होगा। स्वयं से समस्ती तक,
स्वयं से वयं तक मेरे जीवन का
कण कण, क्षण क्षण
भारत भूमि को समर्पित रहेगा और जब
तक भारत विकसित नहीं होता,
जब तक भारत विकसित नहीं होता, तब तक
मैं न रुकूंगा,
न थकूंगा,
न अपने पद से डिगूंगा।
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