Police Violence Against Women Protesters
अब ज़रा ये देखिए।
महिलाओं पर पुलिस यूनिफॉर्म में
पहले तो महिलाओं को लठ बजा रही है, अटैक कर रही है
और उसके बाद एक सादी वर्दी वाले पुलिस वाले से
हंसते हुए गुफ़्तगू भी कर रहे हैं।
जैसे कि बहुत महान काम किया है कि एक महिला को लाठी से मार करके।
आपको ये बता दें कि महिलाओं, अगर महिलाएं प्रोटेस्ट में हों,
तो सीधी सी बात है इसका भी एक प्रोटोकॉल है। महिला पुलिस का एक भी इंसान नहीं दिखाई दे रहा, ये देखिए।
ये जो लाठी मारी पुलिस वाले ने, वो महिला क्या कर रही थी?
क्या वो पुलिस पर अटैक कर रही थी?
प्रोवोकेशन क्या था, मुझे इस तस्वीर में समझ में नहीं आ रहा है।
लेकिन उसके बाद ये जो खीं-खीं खैं-खैं चल रही है,
पुलिस में और एक सादी वर्दी वाले में जो खीं-खीं खैं-खैं चल रही है,
वो ज़रूर कुछ बयान करता है।
ये खीं-खीं खैं-खैं का वक़्त नहीं था, ख़ास तौर से जब आपने इतनी लाठियां भांजी।
ये कौन हैं?
इनके बारे में दिल्ली पुलिस बताएगी।
अगली क्लिप देखते हैं, वो तो और भी भयानक है।
ये देखिए, ये पुलिस की वर्दी में एक पुलिस वाला एक महिला,
जो वहां पर आंदोलन कर रही थी, जो प्रोटेस्ट में शामिल हुई थी,
उसके प्राइवेट पार्ट्स में लाठी मार रहे हैं।
महिला कांस्टेबल नहीं है वहां।
पुरुष कांस्टेबल हैं, मेल ऑफिसर्स हैं, यहां तक भी समझ में आता है।
आप लाठी उठा रहे हैं, गुस्सा दिखा रहे हैं, चलिए मैं ये भी समझने को तैयार हूँ।
लेकिन लाठी लेकर के प्राइवेट पार्ट्स पर हमला करना,
क्या इसकी इजाज़त दिल्ली पुलिस में दी गई है?
क्या ये प्रोटोकॉल का हिस्सा है कि जो महिलाएं आंदोलन कर रही हों या प्रोटेस्ट कर रही हों,
शांतिपूर्ण तरीके से, क्योंकि ना तो मुझे उसके हाथ में पत्थर दिखाई दे रहा है, ना गोला-बारूद, कुछ भी नहीं।
तो क्या ये पुलिस मैनुअल में लिखा है कि आप लाठी लेकर के एक महिला प्रोटेस्टर के प्राइवेट पार्ट्स पर अटैक करें?
कौन हैं ये पुलिस ऑफिसर?
क्या Action लेंगे आप?
Action लेंगे भी या नहीं, क्योंकि अदालत से बल मिल गया ना, अदालत ने ये जो बोल दिया है कि "Don't drag us into this",
हमें इसमें शामिल मत करो।
तो ऐसे कैसे पुलिसिया व्यवस्था चल रही थी कल दिल्ली में, आप ज़रा सोच कर के देखिए।
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