Gandhi's Final Days and Wishes

अब गांधी जी का विषय निकला है इसलिए बता रहा हूं मैं। गांधी जी के

अंतिम दिनों की इच्छा क्या थी? गांधी जी के अंतिम दिनों की इच्छा थी

कि स्वतंत्रता के बाद का मेरा सारा जीवन यहां पाकिस्तान में

व्यतीत हो। उनकी जो जीवनी लिखी है

जी डी तेंडुलकर ने, जो बहुत authentic मानी जाती है। आठ खंडों

में वो जीवनी है

बहुत बड़ी।

उपलब्ध है।

हां उपलब्ध है। उस जीवनी में भी उन्होंने तेंडुलकर जी ने

लिखा है कि गांधी जी ने बारंबार यह कहा है कि मुझे अपने

अंतिम दिनों में पाकिस्तान में रहना है। मेरे पुस्तक

में मैंने एक समाचार की cutting डाली है

जिसमें जिसका शीर्षक Times of India ने दिया है। Times of India के

8 अगस्त 1947 के मुंबई

edition का वो समाचार है। उस समाचार

में heading है 'गांधी to spend rest

of his days in पाकिस्तान।'

वो शीर्षक लिखा है उसमें तो गांधी जी हर बार कह रहे हैं। दुर्भाग्य क्या है?

गांधी जी का दुर्भाग्य

कि बैरिस्टर जिन्ना तो छोड़ दीजिए। पाकिस्तान के मुख्यमंत्री

और प्रधानमंत्री उस समय लियाकत अली खान थे। लियाकत अली खान को छोड़ दीजिए।

पाकिस्तान के एक भी छुटपैया नेता ने भी

गांधी जी को पाकिस्तान आने का आमंत्रण नहीं दिया है। यह सबसे

बड़ा दुर्भाग्य है।

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