Understanding Shaligram and Fossils
सनातन धर्म में शालिग्राम को भगवान विष्णु का
प्राकृतिक स्वरूप माना जाता है। लेकिन सबसे बड़ा रहस्य यह है
कि कई शालिग्राम पर अपने आप बना हुआ सुदर्शन चक्र जैसा
निशान कैसे बन जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार
इन चक्रों को कोई इंसान नहीं बनाता। कहा जाता है
कि वज्र कीट नाम का एक दिव्य जीव पत्थर के अंदर
घूमते हुए यह चक्र बनाता है। इसलिए इन निशानों
को भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का प्रतीक माना जाता
है। लेकिन science कहती है कि यह किसी कीड़े का बनाया
हुआ निशान नहीं है। शालिग्राम असल में
ammonite नाम के करोड़ों साल पुराने समुद्री जीव का
fossil है। इस जीव का खोल पहले से ही गोल और
spiral आकार का होता था। जब यह fossil बना
तो उसी खोल का spiral निशान पत्थर पर हमेशा के
लिए छप गया, जो आज सुदर्शन चक्र जैसा दिखाई
देता है। लेकिन समुद्री जीव हिमालय में कैसे पहुंचा?
क्योंकि करोड़ों साल पहले यहां Tethys नाम का एक विशाल
समुद्र था। बाद में Indian plate और Asian plate की
टक्कर से वही समुद्र का तल ऊपर उठकर
हिमालय बन गया। फिर काली गंडकी नदी लाखों वर्षों
तक इन पहाड़ों को काटती रही। इसी दौरान
fossils वाली चट्टानें टूटकर नदी में आने लगी
और आज वही प्राकृतिक fossils हमें शालिग्राम के रूप में
मिलते हैं।
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