Investigation into Ankita Bhandari Case

कौन हैं ये लोग जो दुष्यंत गौतम नाम के इस आदमी को सिक्किम का गवर्नर बनाए जाने के

बाद इंडिया गेट के सामने धरने पर बैठ गए थे, जिन्हें दिल्ली पुलिस ने सुबह के चार बजे

घसीटते हुए वहां से हटा दिया था और उसके बाद ये लोग मजबूर होकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में

फूट-फूट कर रोने लगते हैं। ये वो लोग हैं जो अपनी इकलौती बेटी अंकिता भंडारी के लिए

इंसाफ मांग रहे थे। पर कैसा इंसाफ और कौन है ये अंकिता भंडारी?

अंकिता भंडारी अपनी 12th class 88 percent से पास करने वाली उत्तराखंड की एक

intelligent लड़की को अपनी hotel management की पढ़ाई अधूरी इसलिए छोड़नी पड़ती है

क्योंकि कोरोना काल में उसके पिता की नौकरी चली जाती है और उसके पास उसकी फीस देने के

लिए महज चालीस हज़ार रुपए तक नहीं होते। अपनी आर्थिक तंगी से वो इस कदर मजबूर हो जाती

है कि ऋषिकेश शहर से दस-बारह किलोमीटर दूर जंगलों के बीच बसे भाजपा के मंत्री रहे

विनोद आर्य के वंतारा नाम के luxury resort में ही रहकर काम करने की अजीब सी शर्त पर

भी receptionist की job के लिए तैयार हो जाती है। नौकरी के पहले दिन ही किसी guest

के

द्वारा inappropriately गले पड़ जाने, पकड़ लिए जाने के बाद भी वो उस job को नहीं

छोड़

पाती है। उस resort के मालिक द्वारा कुछ guest को special service देने की demand को

वो सिरे से खारिज तो कर देती है पर दूसरे कोई job न मिलने तक उस नौकरी में बने रहने

का

फैसला करती है। कुछ समय बाद उस hotel के मालिक और उसके कुछ staff द्वारा अंकिता पर

कुछ

guest को special service देने का लगातार दबाव बनाया जाता है। उससे बदसलूकी की जाती

है

पर उसके hotel छोड़ने के मन बनाते ही उससे माफी मांगकर उसे रोकने के लिए मना लिया जाता

है। फिर उसे बहला-फुसलाकर घुमाने के बहाने से अपने साथ बाहर ले जाया जाता है और उसके

साथ हाथापाई और न जाने क्या-क्या करने के बाद उसे नहर में फेंक दिया जाता है। इसके

कुछ

दिनों बाद अंकिता की लाश को पास के बैराज से निकाला जाता है। जब इस मामले का खुलासा

होता है तो पता चलता है कि उस resort में CCTV बंद पड़े हुए थे। मामले को तूल पकड़ता

देख एक BJP MLA द्वारा उस resort में कथित तौर पर मुख्यमंत्री जी के आदेश के बाद

bulldozer चलवा दिया जाता है, जिसमें अंकिता का वो कमरा भी शामिल होता है।

अब इतनी

जल्दबाजी में उस bulldozer को आरोपियों को सबक सिखाने के लिए चलवाया गया था या सबूत

मिटाने के लिए, इसका फैसला मैं आप पर छोड़ता हूं। क्योंकि

18 सितंबर 2022 को हुए इस

हत्याकांड पर जो अदालत का फैसला 30 मई 2025 को आया था, उसमें पूर्व भाजपा नेता

और उस resort के मालिक विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारी सौरव

भास्कर और अंकित गुप्ता को तो उम्रकैद की सजा सुना दी गई थी, पर उस VIP का कोई जिक्र

नहीं था, जिसे special service देने के नाम पर अंकिता

को प्रताड़ित किया जा रहा था। पर

अभी दिसंबर last में अपने आप को BJP MLA की पत्नी बताने वाली एक actress social media

में आकर अपनी और उस MLA की एक audio clip साझा करती है, जिस पर उस VIP का साफ-साफ

जिक्र है, जो कि उत्तराखंड BJP के शीर्ष नेताओं में

शुमार है और BJP की

top leadership का करीबी बताया जाता है। अब अंकिता के माता पिता का कहना है कि कम

से कम CBI की जांच पूरी हो जाने तक तो दुष्यंत गौतम को गवर्नर न बनाया जाए ताकि

उन्हें

गवर्नर जैसे संवैधानिक पद की सुरक्षा न मिल पाए। क्या लगता है आपको दुष्यंत गौतम

को सिक्किम का गवर्नर बनाया जाना सहयोग है या प्रयोग?

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