बेरोजगारी और युवाओं को कॉकरोच कहने पर चीफ जस्टिस की आलोचना
विकास कहाँ कर रहा है देश?
भाई, हम पिछले 10-12 साल में 25 साल पीछे चले गए।
45% से ऊपर अनएम्प्लॉयमेंट है।
नौजवान जो है डिग्रियां लेकर घूम रहे हैं, काम नहीं है।
और हमारे चीफ जस्टिस ऐसे बिठा रखे हैं जो कहते हैं ये कॉकरोच हैं।
मतलब शर्म के, शर्म से डूब मरना चाहिए।
ये हाल, हाल हो गया हमारे देश का। जहाँ एक चीफ जस्टिस जो है वो नौजवानों को जो पढ़-लिख के इतनी मेहनत करके माँ-बाप का पैसा लगा के
डिग्रियां हासिल करके आए हैं, जॉब ढूंढ रहे हैं।
जब जॉब नहीं मिलेगी तो क्या करेंगे? बोलेंगे ना, आवाज़ उठाएंगे।
और आवाज़ उठाना हमारा संविधान हमें अधिकार देता है।
उनको कॉकरोच कहना, उनके ऊपर इस तरह की चीज़ें लगाना...
तो आप कुछ भी देख लीजिए। देखिए, कोई भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया देख लीजिए,
चाहे वो महिलाओं का सवाल हो, कुछ और हो, सबके ऊपर हमला है।
और हालात जो हैं ये...
मैं कहूँगी कि पाकिस्तान में जब मार्शल लॉ थी ना, जो ज़िया-उल-हक़ का टाइम था,
उस वक़्त जिस तरह की वहाँ घुटन होती होगी लोगों को, उस तरह की घुटन है देश में।
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