Political Commentary on Current Issues
देश का मुखिया
धृतराष्ट्र बना है।
प्रशासन गांधारी।
दुशासन है अंधभक्त। कैसी
ये विपदा भारी।
कुंभकर्ण नींद से आखिर कब जागेगी
जनता? नहीं प्रेम विनय से बात
बनगी। अब उठाना होगा डंडा। जात पात,
मंदिर मस्जिद का खेला बंद करो
सब। बच्चों युवाओं की चिता पर
सेकोगे रोटी कब तक? धधक रहा
है कोना कोना देश घिरा लपटों से।
अब तो राम भी छले जा चुके नीच अधम
कपटों से।
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