Identifying Intellectual Naxals in Society
दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा। इन
दिमागी नक्सलियों को isolate करना होगा।
एक नया शब्द आया है सरकारी महकमे से
"दिमागी नक्सल"。
लाल किले से चेताया गया है उसे, धमकाया गया है।
भारी मुसीबत है वो, ऐसा बताया गया है। कौन
है वो दिमागी नक्सल?
कहां रहता है? मतलब क्या खाता है? कौन सी
नौकरी करता है? क्या पाता है या,
या वो बेरोजगार है?
क्या आप जानते हैं उसे? किसी दिमागी नक्सल को
आप जानते हैं, बता सकते हैं उसकी पहचान क्या है?
उसका... कैसा दिखता है?
गोरा है, काला है, मोटा है, पतला
है। कहां रहता है वो?
उसका हाल कैसा है?
और हुलिया?
किसकी तरफ है वो? और क्यों उसे isolate
किया जाना है? क्या वो,
क्या वही सरकारी पुलों को गिराता है?
सड़कों को धंसा देता है? वही paper leak कराता
है?
क्या उसी ने रोक रखा है विकास का पहिया?
क्या उसी ने बढ़ाई है महंगाई? क्या उसी ने बढ़ाए
हैं तेल, गैस और बिजली के दाम, रेलगाड़ी का किराया?
क्या उसी की वजह से बंद है भर्तियां तमाम?
क्या वही,
वही बढ़ा रहा है मुसलमानों के प्रति वैमनस्य?
और क्या उसी ने रख दी है संप्रभुता
ताक पर?
क्या उसी से खतरा है संविधान को? क्या उसी ने
आदिवासियों की जमीनें छीन ली है और वही काटता
जा रहा है जंगलों को? क्या
उसी ने प्रदूषित कर दिया है नदियों को?
क्या वही
है विकसित भारत की राह का सबसे बड़ा
रोड़ा?
दोस्तों सोचो थोड़ा सा सोचो, खोजो, उसे
खोजो, जाहिर करो उसका हाल,
हुलिया। अखबार में छापो उसका चेहरा।
भाई खोजो, उसे खोजो यार।
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