Critique of Political Leadership and Independence
अजीब आदमी है। खुद भी आजाद रहता है और लोगों को भी बरगलाता है। उनको भी कहता है कि
आजाद हो जाओ। गोरी चमड़ी वालों के काले जूते पॉलिश नहीं कर सकता।
कहता है कि मेरे लोगों की जान भी उतनी कीमती है जितनी तुम्हारे लोगों की
जान कीमती है। जिद करता है, अड़ जाता है कि मैं कमतर नहीं हूं। मैं
तुम्हारा गुलाम नहीं हूं। तुम मेरे ऊपर हुकुम नहीं चला सकते। अड़ जाता है, जिद करता
है। अजीब आदमी है। कहता है कि मेरे लोगों का खून कीमती है। मेरे लोगों का खून
बहा है। मेरा शुक्रिया अदा करो। मेरे लोगों को करा दो। तहसीन पेश
करो। हमारा शुक्रिया अदा करो। कहता है अड्डे नहीं दूंगा। फिर कहता है तुम्हारी जंग
नहीं लड़ूंगा। अजीब आदमी कहता है डू मोर को नहीं समझ आती मुझे क्या है। अगर
ड्रोन आया तो मार के गिरा दूंगा। इस तरह की धमकियां देता है। क्या आदमी है?
अजीब आदमी। अमेरिका को कहता है तुम्हारी policy गलत है। वो इस वक्त दुनिया की super
power है। उसको कह रहा है कि तुम्हारी policy गलत है। उसको कह रहा है
absolutely not। कैसे हो सकता है। उसकी आंखों में आंखें कैसे डाल सकता
है। उसके सामने बैठ के कैसे ऐतमाद के साथ बात कर सकता है। वहां तो पर्ची चलती
है। बेकी बेकी बातें करता है। कहता है जब अल्लाह ने तुम्हें पर दिए हैं तो
फिर चूहे की तरह जमीन पर क्यों रेंगते हो। ऐसी अजीब अजीब बातें।
नौजवानों को पढ़ाता है, उन्हें समझाता है। ये क्या बात हुई कि हम
आजाद हैं,
जिससे चाहे मिले, जिससे चाहे ना मिले, जिससे चाहे ताल्लुकात
बनाएं। पाकिस्तान के फैसले पाकिस्तान करे। ये कहता है। गुलामों को
आजादी के ख्वाब दिखाता है। अपने मुल्क का लबास पहनता है। अपने
culture और अपने मजहब के ऊपर फखर करता है। अजीब
आदमी। बहरों से बात करता है। अंधों को रोशनी दिखाता है।
हटाओ इसको। ये कौन है? निकालो इसको। ये सबको खराब कर रहा है।
End of transcript · 327 words