Election Voting Patterns and Manipulation
गणेश कुमार को कैसे पता चलेगा कि कौन मोदी को vote दे रहा है और कौन मोदी को vote नहीं
दे रहा है। वो कैसे किसी का नाम काट सकते हैं। जबकि voting एक secret process
है। उसमें पता नहीं चलता है कि कौन किसको vote देता है तो फिर
चुन चुन के नाम काटने का सवाल ही नहीं पैदा होता। गणेश कुमार ऐसा कैसे कर सकते हैं?
यह सवाल हर अंधभक्त और मोदी supporter पूछ रहा है। ध्यान से सुनिए, मैं आपको बता
रहा हूं कि चुनाव आयोग को कैसे पता चलता है कि कौन मोदी का voter है और कौन नहीं
है। जब कहीं election होता है तो हर seat के हिसाब से अलग अलग polling booth
बनाए जाते हैं। election commission के मुताबिक हर voter के घर से करीब दो
kilometer के अंदर उसका polling booth होना चाहिए और हर एक polling booth
पर करीब बारह सौ voter होते हैं। पहले यह संख्या पंद्रह सौ थी, अब बारह
सौ कर दी गई है और जब किसी seat के लिए voting की counting होती है तो इन सारे
polling booth के vote को मिलाकर उनका number merge कर दिया जाता है और उसके बाद
result आता है। अब होता यह है कि हर polling booth के हिसाब से election
commission को यह data मिल जाता है कि किस booth पर किस party
को ज्यादा vote मिले हैं और किसको कम vote मिले हैं। हालांकि इसमें नाम नहीं
पता चलता लेकिन numbers पता चल जाते हैं। चलिए अब इसे एक example से समझते
हैं। मान लीजिए कि कोई विधानसभा seat है उसमें ढाई सौ polling booth बनाए गए हैं। अब
वहां पिछले election के हिसाब से चुनाव आयोग को यह पता होता है कि वहां की voting
pattern क्या रही है यानी किन बूथ पर BJP को ज्यादा vote मिले हैं और किन किन
बूथ पर other parties कांग्रेस या सपा या किसी और को कितने vote मिले
हैं। अब खेल यहीं से शुरू होता है। पहला काम election commission यह करेगा कि
उस जो particular बूथ है, जिस पर BJP को vote कम मिल रहे हैं,
वहां के voter की संख्या को कम कर देगा और दूसरा काम जो करेगा वह देखेगा कि उस
particular जो बूथ है, जहां BJP को कम vote मिल रहे हैं, वहां पर
किस जाति के लोग या किस धर्म के लोग ज्यादा हैं और वो किसे vote कर रहे
हैं। क्योंकि नाम नहीं पता चलता but यह पता चल जाता है कि इस बूथ से
particular इतने
ज्यादा vote इस party को मिले हैं तो जाति और धर्म के हिसाब से इन्हें तय
करने में आसानी हो जाती है कि इस particular बूथ से BJP को ज्यादा vote
नहीं मिल रहे हैं और फिर वहां के नाम हटाने में आसानी होती है और उसी के हिसाब
से उस state में उस जाति या उस धर्म के धर्म के लोगों के
ज्यादातर नाम काट दिए जाते हैं और कुछ फर्जी vote जोड़ दिए जाते हैं। अभी
UP में तेरह लाख फर्जी vote जोड़ने का मामला सामने आया है और यही फर्जी vote जो होते
हैं BJP के पक्ष में चले जाते हैं। बंगाल में मुस्लिम voters के नाम बहुत ज्यादा काटे
गए और इसके इतर एक और बात है। जो पार्टियां हैं वह अपना internal
survey कराती हैं और क्योंकि BJP के पास सबसे ज्यादा पैसा है इसलिए
BJP ज्यादा गहराई से ज्यादा अच्छे survey कराती है और उसे पहले ही
idea हो जाता है कि हमारा vote कहां ज्यादा कटने वाला है और इसके
बाद वह चुनाव आयोग को बोलेगी, sorry आदेश देगी और उसके बाद असली
game शुरू हो जाएगा। वहां के लोगों का नाम काटना शुरू हो जाएगा, कुछ फर्जी vote जुड़ने
शुरू हो जाएंगे और वही फर्जी vote बाद में BJP के पक्ष में चले
जाएंगे। यही pattern है vote चोरी का vote काटने का। अगर इससे
जुड़ा आपका कोई सवाल है तो comment में बता सकते हैं। अगर आपको कुछ कहना है तो अपनी
राय भी comment में रख सकते हैं।
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