Understanding Our Spiritual Identity
हम संसार के हैं ना, संसार हमारा है।
हम शरीर के हैं ना, शरीर हमारी है।
हम परमात्मा के हैं, परमात्मा हमारे हैं। यह शरीर परमात्मा की दी
हुई
है। यह संसार परमात्मा का दिया हुआ है। जब हमको यह बोध हो
जाएगा कि यह संसार जो आकाशा का टेंट बना हुआ जिसमें जीव आकर
भटक रहा है, लगता और आके भोग रहा है,
तो इसको रास नहीं आएगा। मिट्टी धूल के समान नजर आएगा।
अमूमन लोग जो है अपने को यह मानते हैं हम शरीर हैं।
हम शरीर नहीं है। हम शाश्वत परमात्मा के अंश हैं।
हमको जानना चाहिए, मानव को यह जानना चाहिए कि हम कौन है?
हमारा स्वरूप क्या है? हम कहां से आए हैं, किस लिए आए हैं,
क्यों आए हैं?
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