ब्राह्मणवाद, महिलाओं के अधिकार और कपड़ों पर बहस
अगर आप सच में चाहती हैं कि ब्राह्मणवाद जिंदाबाद रहे
तो आप सड़कों पर मत घूमिए। टी शर्ट और पैंट पहन के आप
घर जाइए। चारदीवारी के अंदर लंबा सा घूंघट
पहनिए और अपने जो पति है, अपने पिता है, उनके आगे
झुककर के उनके पैरों के नीचे बैठिए। क्योंकि आपकी जगह
ब्राह्मणवाद ने वही बताई है। मैं वही कह रही हूं कि पशु,
गरीब, शूद्र और नारी का एक ही एक ही जगह बताता है
ब्राह्मणवाद और वह है कि वह ताड़ना के अधिकारी। अगर
लेवल में आने की बात है तो मैं उन लोगों से कहना चाहूंगी। आपके
घर में जो औरतें हैं ना जो सलवार सूट पहनना पसंद करती हैं,
आप उनको भी बोलिए ना कि सलवार सूट क्यों पहनी हो, जाकर स्कर्ट पहनो। आपको
modernize करना है ना लोगों को आपको westernize करना है। आप चाहते
हैं कि समाज में जो तमाम आजादीयां हैं, आप यह कह रहे हैं कि हम आजादी दे
रहे हैं महिलाओं को आत्मनिर्भर होने की, expression की, समाज में
खुले रूप से जीने की तो आप ये खुद से शुरू कीजिए। आप खुद से क्यों नहीं शुरू
करते हैं?
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