नौकरी, बेरोजगारी और जिंदगी की जर्नी का आनंद
पर क्या फायदा भाई जॉब लगने का? तुम्हें क्या लग रहा है ये इतनी बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स किस लिए खोल रखी हैं?
पिछले पांच सालों में जो गवर्नमेंट ने इंजीनियरिंग की डिग्री बांटी है ना भाई, रद्दी के भाव में।
हर बंदा तीन से चार साल का एक्सपीरियंस लेके बैठा है, सोच रहा है कैसे भी करके भाई बस पैसे आ जाएं भाई।
तुम्हें लग रहा होगा इन्फ्लुएंसर लाइन में बहुत पैसा है भाई, खुद का बिज़नेस डाल देते हैं भाई, पॉलिटिक्स में बहुत पैसा है।
नहीं भाई, वो भी अपनी फील्ड में लगे पड़े हैं भाई कि कैसे भी करके दो रोटी आ जाए भाई।
तभी तो सट्टा प्रमोट हो रहा है। तुम्हें क्या लग रहा है? कौन खेल रहा है इसे भाई?
जॉब ही नहीं है लोगों के पास।
वो जो लड़की तुम्हारी नज़र में क्लीवेज दिखाती है, गलत है भाई समाज की नज़रों में।
वो भी डिसिप्लिन और कंसिस्टेंट है भाई कि चलो दस लाख मिल रहे हैं, लाखों कमा रहे हैं भाई, गाली तो आ रही हैं।
सुन लेंगे। पैसे तो आ रहे हैं, कहीं से तो आ रहे हैं।
तुम अपनी लाइफ के किसी भी फेज़ से खुश नहीं थे भाई। तुम्हें लगा कि ये स्कूल लाइफ बेकार हो गई यार मेरी।
अब तो... अब तो कॉलेज लाइफ सही करनी है मुझे, ठीक है?
कॉलेज बेकार हो गई, अब जॉब लग गई। जॉब लग गई ना, सेट है लाइफ।
अब जॉब लाइफ में भी तुम खुश नहीं हो।
नोलन मर गया मेरे भाई बता बता के कि इंटरस्टेलर, इन्सेप्शन, ओपनहाइमर।
थ्योरी और प्रैक्टिकल में बहुत अंतर होता है।
तुम जैसे चीज़ें प्लान करते हो, वैसी नहीं होती हैं।
तुमको जर्नी को एन्जॉय करना पड़ेगा।
हां अगर कोई काम पसंद है...
...तो उसमें तो मेहनत करनी पड़ेगी।
आज के लिए बहुत मोटिवेशन दोस्तों। थैंक यू।
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