Modi's Alleged Favoritism Towards Adani
नरेंद्र मोदी, अडानी के agent की तरह काम कर रहे हैं। ये
बात पूरा
देश जानता है। लेकिन कैसे? आइए आपको बताते हैं। Media
report बताती है कि जब भी नरेंद्र मोदी विदेश गए,
उसके कुछ महीने बाद अडानी को उस देश से जुड़े project मिल गए।
जून 2015 में नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की
प्रधानमंत्री से मुलाकात की और सिर्फ दो महीने बाद अडानी
ने बांग्लादेश को बिजली देने की deal कर ली। श्रीलंका में भी ऐसा ही
हुआ। फरवरी 2020 में नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका
के प्रधानमंत्री से मुलाकात की और कुछ महीने बाद अडानी को
श्रीलंका में wind energy का project मिल गया। इसमें तो यहां तक खबर आई
कि नरेंद्र मोदी ने ये project अडानी को देने के
लिए श्रीलंका पर दबाव बनाया था। दिसंबर 2023
में नरेंद्र मोदी ने केन्या के राष्ट्रपति से मुलाकात की
और छह महीने बाद अडानी को केन्या के नैरोबी हवाई अड्डे का काम मिल
गया। लेकिन जब केन्या में अडानी के खिलाफ protest हुए तो इस
deal पर वहां के High Court ने रोक लगा दी। और अब अडानी ने
उज्बेकिस्तान के निवेश मंत्री से मुलाकात की और hydro power
project में पैसा लगाने की बात कही। इस मुलाकात के ठीक
बाद अडानी के agent मोदी उज्बेकिस्तान पहुंच गए। मतलब
साफ है कि नरेंद्र मोदी ने पूरी ताकत लगाकर अपने
परम मित्र अडानी को deal दिलवाई। इतना ही नहीं नरेंद्र मोदी
ने सिंगापुर, वियतनाम, मलेशिया, इसराइल,
तंजानिया, नेपाल से जुड़ी deal में भी agent की तरह
काम
किया। साफ है कि नरेंद्र मोदी ने देश के लिए
नहीं, अडानी के agent की तरह काम किया और बड़े
बड़े काम
दिलवाए। नरेंद्र मोदी का साफ फंडा है। विदेश जाऊंगा,
दोस्त को धंधा दिलाऊंगा और उसे खूब अमीर
बनाऊंगा।
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