Critique of Raksha Bandhan Festival
सबसे घटिया त्योहार लगता है मुझे रक्षाबंधन। क्योंकि मेरा चोमू भाई मेरे को
पूरे साल नहीं पूछता और रक्षाबंधन वाले दिन You know उसको राखी
बांधो। वो एक दिन प्यार आ जाए। मुझे ये hypocrisy पसंद नहीं
है। मेरे को तो trauma आने लग जाता है इस त्योहार के नाम पर। ना मैं excited होती
हूं कि हां मैं अच्छा अच्छा पहनूंगी। ना मैं इसलिए excited होती हूं कि हां भाई
मेरे को पैसे मिलेंगे क्योंकि मेरा भाई तो मुझे पैसे तक भी नहीं देता। इतना
चिंदी है, इतना चिंदी है कि उसके पास अगर है भी ना तो
भी नहीं देगा मेरे को। मैं कितनी
सारी लड़कियों को देखती हूं भाई उसका भाई उनको ये gift कर रहा है, वो gift कर रहा है।
कुछ नहीं तो पैसे दे रहा है but मेरा भाई कंजूस और चिंदी आदमी मैंने
अपनी इस
दुनिया में नहीं देखा किसी को। रक्षा तू बाद में करियो, तू पहले ढंका भाई बन
जा मेरा। राखी बांधी कल ही उसने हाथ से फेंक दिया। मेरे को लगता है trauma।
मेरा ना मत्था पंक जाता है ये सब देख। अब तो ऐसा होता है कि भाई मातम आ जाता है।
मतलब मैं उस दिन बस कहीं गायब हो जाऊं। मुझे नहीं करना बिल्कुल भी ये
celebrate। एकदम घटिया त्योहार लगता है।
End of transcript · 215 words