Political Commentary on Historical Movements
To my generation. हर पीढ़ी के पास ऐसे moments आते हैं जब
उसे यह decide करना होता है कि वह comfort को चुनेगी या अपने जमीर को चुनेगी।
To my अली, गली, नाली में पड़े
देशद्रोही। आपने comfort चुना।
जमीर बेच के।
जमीर बेचा। चंद पैसों में बिक गया।
हम सब जो आज कर रहे हैं हम वो पहले कर चुके हैं। 1942 में
जब अंग्रेजी हुकूमत ने आजादी के आंदोलन के leaders को गिरफ्तार किया तो उन्होंने सोचा
कि यह movement मर गया है। लेकिन वो movement जिंदा था। उस दौर की नई पीढ़ी ने
उस
movement को lead किया। आज मोदी और शाह वही playbook दा रहा रहे
हैं। सड़कों को बंद कर रहे हैं। लोगों को detain कर रहे हैं। बोलने से चुप करा रहे
हैं।
वैसे मैं एक बात बताऊं। आप
42 के बाद वाला समय खा गए।
उसके बाद वाला time कहां है? मोदी जी तो अब आए हैं। 42 से
सीधा
2014 या 20, 26 थोड़ी ना आया
है।
जैसे बाहर से पंछी खाती है ना वो डकार मार लेती है ना उसी तरह
से बीच वाला time खा गए।
कांग्रेस का time था वो।
उसके बीच का time तो कांग्रेस का था। उसके पत्ते नहीं
खोलेंगे। पत्तियां मिली है इसलिए।
पगली पूरी बात बताया कर। उसके बाद क्या हुआ था?
सरदारों के साथ क्या हुआ? हिंदुओं के साथ क्या हुआ?
मुसलमानों के साथ क्या-क्या हुआ हैं?
वो नहीं बताएंगे। अच्छा कैसे बता देंगे?
जो अपने बाप की नहीं हुई वो देश की कैसे हो जाएगी? है ना?
मेरी जा बन्ना।
डॉक्टर।
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