मुसलमानों के अधिकार, संविधान और शरियत पर चर्चा
देश में जो मुसलमान रह रहा है
उसकी उतनी चिंता आपको नहीं है।
मुसलमान की कौन चिंता नहीं हो रही।
उसको मकान मिल रहा है, उसको खाने के लिए मिल रहा
है, उसके लिए उपचार के लिए मिल रहा है। लेकिन वो
भारत का कानून भी तो माने।
कानून भारत के अनुसार
माने। भारत के संविधान को सम्मान करें।
संविधान के
अनुसार देश चलेगा।
शरियत हमारा व्यक्तिगत विषय हो सकता है,
लेकिन शरियत
संविधान से बड़ा तो नहीं हो सकता।
और वह इस बात को माने
भारत की जनता तो सिर आंखों पर बिठाएगी।
आप लोग अल्पसंख्यकों के मन
में वो जगह क्यों नहीं बना पाए?
क्योंकि हम हिंदू आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं कर पाए।
हिंदू भारत की मूल आत्मा है। उसका
अपमान नहीं किया जा
सकता।
जिनको यह गलतफहमी होगी
कि हम इस भावना, इस आत्मा का अपमान करके वोट बैंक
की राजनीति करेंगे, ऐसी राजनीति को ठोकर मार कर के बाहर जाएंगे।
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