Delhi Police AI Technology Controversy
अमित शाह के गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली दिल्ली पुलिस
और उसकी अत्याधुनिक AI तकनीक की एक ऐसी पोल
खुली है, जिसने पूरे तंत्र पर गंभीर सवाल
खड़े कर दिए हैं। हाल ही में जंतर मंतर पर हुए विरोध
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि
उनकी फेशियल रिएक्शन सिस्टम यानी
FRS तकनीक ने 2873 ऐसे
लोगों की पहचान की जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है। लेकिन
जब एक मीडिया रिपोर्ट ने इस पूरे लिस्ट की तहकीकात की तो
जो सच सामने आया उसने दिल्ली पुलिस के दावों
की धज्जियां उड़ा दी है। जांच में पाया गया है कि पुलिस
की सूची में शामिल कम से कम पच्चीस लोग उस
समय तिहाड़, मंडोली और रोहिणी की जेलों में बंद थे
जब FRS कैमरे ने उन्हें जंतर मंतर की भीड़ में देख रहे
थे। जिन लोगों को तकनीक ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद
दिखाया, उनमें हत्या, हत्या के प्रयास और बलात्कार
जैसे गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं।
उदाहरण के तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग का शूटर
योगेश, जो पहले से ही तिहाड़ जेल में बंद था,
उसे भी दिल्ली पुलिस के AI कैमरों ने जंतर मंतर पर
घूमते हुए पकड़ लिया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या
गृह मंत्रालय के तहत आने वाली दिल्ली पुलिस
तकनीक के नाम पर फर्जी आंकड़े पेश कर रही
है या फिर किसी बड़ी साजिश के तहत आम
प्रदर्शनों और आंदोलनों को बदनाम करने के लिए
ऐसा किया जा रहा है। जो कैदी जेल की सलाखों के
पीछे बंद थे, वो पुलिस के कैमरों वाली लिस्ट में
कैसे आ गए? यह सिर्फ तकनीक की विफलता नहीं बल्कि
जांच और रिपोर्ट तैयार करने वाली दिल्ली पुलिस की
कार्यशैली पर एक बड़ा थप्पा है। फिलहाल आप
इस रिपोर्ट पर क्या राय है हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं और अगर वीडियो अच्छा
लगा
हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ज्यादा से ज्यादा से लाइक
करें और हमारे चैनल यानी देश नीति को subscribe करना ना
भूलें। मैं हूं आपके साथ एंजिला पांडे।
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