Protests and Hunger Strikes in India
20 सितंबर 1932 को गांधी जी ने आमरण अनशन शुरू किया।
चार दिन बाद 24 सितंबर को पूना पैक्ट हुआ।
और 26 सितंबर को यानी चार दिनों में ही ब्रिटिश सरकार ने उसे स्वीकार किया और गांधी जी का अनशन खत्म करवा दिया।
अब 1984, सोनम वांगचुक के पिता एक्टिविस्ट सोनम वांग्याल ने लद्दाख को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलवाने की मांग को लेकर आमरण अनशन किया।
और कुछ ही दिनों में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मामले में हस्तक्षेप किया और उनका अनशन खत्म करवा दिया।
16 अगस्त 2011 को अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत जन लोकपाल कानून लाने की मांग की और अनशन शुरू किया।
और तब की कांग्रेस सरकार ने 12 दिनों के बाद ही 28 अगस्त को संसद में जन लोकपाल से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर सहमति जताई और उनका अनशन खत्म करवा दिया गया।
अब 2018, प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने गंगा को प्रदूषण से मुक्त करवाने की मांग को लेकर नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली भाजपा सरकार से मांग की।
लेकिन 111 दिनों तक किसी ने भी उनको सुना नहीं, ना ही उनकी सुध ली और 112वें दिन अनशन करते हुए उन्होंने दम तोड़ दिया।
और आज 17 जुलाई 2026 है और सोनम वांगचुक को आमरण अनशन करते हुए 19 दिनों से ज्यादा हो चुके हैं।
देश के छात्रों के अच्छे भविष्य के लिए वो लड़ रहे हैं लेकिन इस गूंगी, बहरी, बेरहम सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही।
देश के लिए आमरण अनशन करने वालों के आगे कांग्रेस तो क्या, अंग्रेजों की हुकूमत तक झुक गई।
और आज जो भाजपा सरकार देश को विश्व गुरु बनाने, अमृत काल और रामराज लाने की बात करती है, उसने दिखा दिया कि इनका अहंकार और सत्ता की भूख इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है
कि ना तो साइंटिस्ट का अनशन दिख रहा है, ना ही देश के बच्चों का भविष्य।
धिक्कार है ऐसी बेरहम और बेशर्म सरकार पर।
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