Political Speech on Historical Events
इस सभा में, मैं इस
जो बैठे लोग हैं, उनको खोल के आँख दिखाना चाहता हूँ।
एक घटना से, बापू जी, आपको याद होगा,
रामचंद्र वीर ने गोहत्या के लिए आंदोलन किया था, अनशन की थी।
एक सौ चौरासी दिन अनशन चला था दिल्ली में।
तो प्रभुदत्त ब्रह्मचारी और करपात्री जी महाराज ने गोहत्या आंदोलन चलाया था।
श्रीमती इंदिरा गांधी उस समय प्रधानमंत्री थी।
बापू जी, आगे-आगे गाय चल रहा था, शायद उसमें आप सम्मिलित भी होंगे,
और पीछे-पीछे हमारे संत चल रहे थे।
और सत्ता के मद में मतवाले लोगों ने बे-मंत से गोली चार्ज किया था
और उसमें संत भी मरे थे और गौ भी मरी थी।
करपात्री जी महाराज का वह विज्ञप्ति, उस समय
मीडिया नहीं थी, उस समय पेपर मीडिया थी, आर्यावर्त और केसरी में छपा था,
कल्याण गौ अंक विशेषांक निकाल के देखो।
उस समय करपात्री जी ने हाथ जोड़कर कहा था,
"हे सत्ता के धीनों, हमारे पूर्वजों ने संविधान स्वीकार किया है,
उसमें भी मेरा भी हक़ है, मैं भी भारत का नागरिक हूँ।
आपने संतों को मारा, जाओ हम संतों का ख़ून माफ़ करते हैं।
लेकिन याद रखना, एक गाय की हत्या हुई।
जाइए, आपका कुल का नाश गोपाष्टमी तिथि में होगा।"
सब लोग भूल गए, मैं नहीं भूला।
मैं नाम दे रहा हूँ अब।
संजय गांधी मरे आकाश में, तिथि था गोपाष्टमी।
इंद्रा मरी आवास में, तिथि था गोपाष्टमी।
राजीव मरे मद्रास में, तिथि था गोपाष्टमी।
[जयघोष]
मैं भारत माता को बचाना चाहता हूँ।
यही बात जयेंद्र सरस्वती के समय में सबसे पहले बापू ने जयललिता से कहा था,
"जयललिता जी, इतना बड़ा मत कीजिए क्योंकि विनाश आ जाएगा।"
नहीं लोग समझे, एक सुनामी में जयललिता जी की और केंद्र की सरकार की औकात सामने आ गई।
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