Debate on Manusmriti and Indian Tradition
राहुल जी कहते हैं,
बेटियों को भड़काने का काम कर रहे हैं।
कहते हैं मनुस्मृति से बाहर निकलिए। भाई
भारत की परंपरा तो ऐसी है, आप
माने या ना माने
कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन गलत तथ्यों से अवगत
तो मत कराइए। आपको मनुस्मृति को मानना
है मानिए, नहीं मानना है मत मानिए।
लेकिन मनुस्मृति की अच्छाइयों को भी बताइए और बुराइयों को भी
बताइए, बहस करिए इस पर।
अथर्ववेद जिसकी चर्चा करता हो,
शतपथ ब्राह्मण में जिसकी चर्चा हुई हो,
महाभारत जिसके बारे में चर्चा करता और मत्स्य पुराण
जिसकी महिमा का गान करता हो,
उस मनु को आप अपमानित क्यों करना चाहते हैं?
आप माने ना माने कभी हमने नहीं कहा। आप तो राम की
विरासत को भी अपमानित करते हैं। आपकी party ने तो
कह दिया था कि राम हुए ही नहीं। लेकिन
आज अयोध्या में कल भी आचरण आपकी party का और आपके नेताओं
का आचरण
देश ने देखा है, दुनिया ने देखा है। आप
माने ना माने
लेकिन याद रखना
आज भी हर सनातनी जिस कालगणना को मानता
है,
वह कालगणना किसी और ने नहीं दी है।
राहुल जी वह कालगणना मनु ने दी है और वह
कालगणना है जब पलक झपकता है उसको
निमेष कहते हैं। हमारे यहां कालगणना पलक
झपक-झपकने को निमेष कहते हैं। पच्चीस
निमेष का एक काष्ठा होता है
और एक तीस काष्ठा का एक कला,
तीस कला का एक मुहूर्त
और तीस मुहूर्त का
एक अहोरात्र। अहोरात्र का मतलब एक पूरी
रात और दिन मिलाकर के एक अहोरात्र होता
है। पंद्रह दिन
यानी एक पंद्रह अहोरात्र का
एक पक्ष होता है
और
दो पक्ष का
यानी
कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष, हर महीने में दो पक्ष चलते
हैं, तो दो पक्ष का एक माह होता
है। छह माह का एक अयन होता है
और दो अयन का एक वर्ष होता है। याद
रखना मकर संक्रांति का आयोजन जब हम करते
हैं, भगवान सूर्य जब उत्तरायण में आते हैं तो मकर
संक्रांति आती है। हम लोग नदियों में स्नान
करते हैं। प्रयागराज में माघ का मेला लगता
है। हम लोग जाते हैं, संगम में स्नान करते
हैं। और भीष्म पितामह ने तो
उत्तरायण आने के लिए अपने शरीर को
सरसैया में वेदना में झेलते रहे। लेकिन उत्तरायण आने
के बाद ही अपने प्राणों को छोड़ा था। ये दो
अयन का एक वर्ष होता है
और याद रखना
इससे बड़ी कालगणना दुनिया में नहीं।
पैंतालीस लाख बत्तीस हज़ार वर्ष का एक
महायुग हमने माना है, एक प्रयाय माना है।
इकत्तीस प्रयाय को एक मन्वंतर के रूप में माना
है और चौदह मन्वंतर को एक कल्प
के रूप में माना है। यह भारत का
कालगणना है और यह किसी और ने नहीं,
राहुल जी ये आपके नाना ने नहीं
दिया है, परनाना ने नहीं दिया है, आपकी दादी ने नहीं
दिया है। ये दिया है मनु ने दिया है। ये मनु ने
दिया है और जिसको आज भी हर सनातनी
जिसका पालन करते अपने पर्व और त्योहारों को मानता है।
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