Conditions of Baiga Tribal Children
हमारे देश में गरीबी देखनी है ना,
तो इन बच्चों को देखिए। यह बैगा आदिवासियों के बच्चे
हैं। यहां लगभग पिछले चार महीने से बैगा आदिवासियों और
गोंड आदिवासियों के बच्चों की मौत हो रही है। मीजल्स और मलेरिया के
चलते। यह बच्चे अभी school से लौट रहे
होंगे। हाथ में इनके बस्ता नहीं
है। एक बच्चा पूरी गर्मी में उठाया हुआ है उस लड़की
ने और साथ में एक छोटा सा बच्चा और
है। इनके पैरों में आपको चप्पल देखने को नहीं मिलेगी क्योंकि
इनके पास उतने पैसे ही नहीं है कि चप्पल afford कर सकें।
खाना इनको नहीं मिलता है क्योंकि उतने पैसे नहीं मां
बाप के पास कि दो तीन वक्त का खाना दे सके। nutritious food
तक पहुंचता नहीं सरकारी योजनाओं का क्योंकि सरकारों को कोई परवाह नहीं
पड़ी। लेकिन यार जिनके भी बच्चे हैं,
एक बार वह अपने बच्चों को देखकर इन बच्चों की ओर ध्यान दे तो उनको
समझ आएगा कि असल में हमारे देश के क्या हालात
हैं। इनके लिए बाहरी दुनिया बिल्कुल कटी हुई
है। इनको पता ही नहीं यहां से बाहर क्या चल रहा है दुनिया
में। दुनिया चांद तक पहुंच रही है। इनके लिए यहां से
बालाघाट जाना भी चांद पर पहुंचने जैसा है। और
जिन सरकारों को इनके दरवाजे तक आना चाहिए कि यार वह कहते हैं
ना कि एक मां के तीन बच्चे हैं, एक बच्चा अपाहिज है तो मां उसका ख्याल
ज्यादा
रखती है। सरकारों को कोई परवाह नहीं है इन बच्चों
की। जबकि इनका ख्याल रखना सबसे ज्यादा जरूरी
है। यह बैगा आदिवासियों की सच्चाई है। हम
लोग यहां से report कर रहे हैं उन्हीं deaths पर। इन बैगा आदिवासी बच्चों की
जो स्थिति है उन पर। जल्दी एक report आप तक लेकर भी आएंगे
पूरी। लेकिन मैं आपको दिखाना चाहता था कि एक
बार आप इन बच्चों की हालत देखिए। बैगा आदिवासियों की हालत
देखिए। इनके लिए जीना भी मौत से बदतर
है।
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