मजबूत और स्वतंत्र होने का अकेलापन
मर जा रहे थे strong and dependent बनने के लिए। ऐसा लगता था खुद
के पैसे होंगे,
freedom होगी, जो मर्जी आएगी करेंगे, जहां मर्जी आएगी जाएंगे। कोई रोकने टोकने
वाला नहीं होगा। ऐसी तैसी कर देंगे। आज के date में पता चल रहा है कि weak थे
तो ज्यादा सही था। कम से कम चार लोग पूछते तो थे कि कैसे करोगी, कहां जाओगी?
ऐसे नहीं वैसे कर लो। आज की date में तो कोई पूछने ही वाला नहीं है। मतलब अगर मैं
रो भी दूँ ना तो शायद कोई ये नहीं पूछेगा कि क्या हो गया, क्या तकलीफ है। लोगों को ये
लगेगा तुम तो strong हो यार, तुम कैसे रो सकती हो?
और क्या करूं ऐसी freedom का? कहां चले जाऊं?
मतलब अब, अब बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। कोई पूछता
ही नहीं है कि तुम
ठीक तो हो?
सब चीजें सही तो चल रही है। कोई दुख तकलीफ तो नहीं है। सबको ऐसा लगता है कि
अरे तुम तो इतने time से manage करते आए हो। तुम तो हर एक चीज manage कर लोगे।
तुम्हें, तुम्हें अभी किसी की जरूरत भी नहीं है। तुम
strong हो। तुम हर तरीके से सब
कुछ handle कर सकते हो।
पर
नहीं यार,
चाहिए कि कोई पूछे। चाहिए कि किसी को फर्क पड़े, किसी को चिंता हो,
किसी को फिक्र हो कि
कैसे सब कुछ कर रहे हो। तुम ठीक हो कि नहीं हो। कोई नहीं है पूछने वाला यार।
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