Discussion on Violence and Journalism
जो वहां से चिल्ला रहे थे कि मारपीट की जा रही है पत्रकारों के साथ
तो आप आते हैं यहां पे। अहिंसा का पाठ पढ़ा देते।
क्योंकि आपको डर है। आपकी हिम्मत नहीं है। आप यहां आ जाओ। आप
बच्चों को face नहीं कर सकते।
आप बच्चों को बच्चों को चेहरा नहीं दिखा सकते थे। और
last में जब वो
beat cover करने वाले जो विपक्ष के reporter हैं उनको भेजा जाने लग गया। लगा
कि इनको कुछ लोग पहचानेंगे तो नहीं होगा क्योंकि वो अच्छी पत्रकारिता करते
हैं। अब इनको लग गया कि भाई जो TV के चेहरे हैं वो तो whitewash हो चुके। उनकी कोई
credibility नहीं रही। इन्होंने right wing के extremism को खड़ा किया।
जो भी तंत्र काम कर रहा है उसने right wing extremism लोगों को खड़ा किया और दोनों को
आपस में लड़ा दिया। आप देखोगे दोनों आपस में लड़ रहे हैं। एक तरफ से इधर से mobile
चलता है एक तरफ से उधर चलता है। आपको कोई option नहीं बचता है। दोनों एक दूसरे को
गाली
गाली कर। अब वहां पे state की जिम्मेदारी शुरू होती है। यह जो
situation है, यह तो हिंसा की तरफ जा रही है। कि मारपीट हो
जाएगी
कहीं। कहीं कोई कुछ कर लेगा। फिर आप जो है फिर blame game शुरू होगा।
पुलिस को इस पे कम से कम तखत पर रहकर के काम करना चाहिए।
लगेगी आग तो आएंगे घर के
ही ज़द में। लगेगी आग
तो आएंगे घर के ही
ज़द में।
यहां पे सिर्फ हमारा मकान जो है।
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