Dramatic Dialogue on Social Issues
गुरु गड़े।
मैं कोगा।
मैं अम्मा को जंगल से बचाया,
नाग से बचाया। ब्राह्मण से नहीं बचा सका।
देवता महाप्रेत से कोगा नहीं डरता, लेकिन ब्राह्मण से।
कहाँ है वह अभगन?
परभु का झोपड़े में।
क्या बोलना?
मास्टर
कपट किया।
छोड़ के उसको मास्टर भाग गया।
अब अम्मा को लाने का।
मैं जाता।
मैं लाता उसको।
फिर मेरा जिम्मेदारी जिम्मेदारी पूरा।
नहीं कोगा। अब वो इस घर में नहीं आएगी।
गुरु गड़े।
जब वो विधवा हुई थी,
उसी समय उसे घर में लाना अनुचित था।
वो
किधर जाएगी गुरु गड़े?
जहाँ उसका प्रारब्ध।
वो आपका बेटी है।
कौन पुत्री? कौन पिता?
ना तातो, ना माता, ना बंधु, ना दाता।
ना पुत्रो, ना पुत्री।
ये श्लोक कोगा को नहीं बोलना। छोटा था तब से सुनता है। ये तुम्हारा श्लोक नहीं
मानता। नहीं मानता तुम्हारा मंत्र।
नहीं मानता तुम्हारा स्वर्ग। नहीं मानता मोक्ष तुम्हारा।
ये ऐसा मंत्र पे कोगा थू थू। ब्राह्मण
है ब्राह्मण। अपना बेटी को नहीं संभालता।
धर्म संभालने को जाता है। वाह, वाह रे ब्राह्मण!
ब्राह्मण वो
जितेन्द्रिया धर्मपरा स्वाध्याय निरता शुचि
कामा क्रोधा
वशव्यस्य
तम देवो ब्राह्मणं विदुः।
ब्राह्मण
ब्राह्मण। न तातो न माता। थू!
End of transcript · 187 words