Investigating Election Commission Disputes

लोग जैसे कह रहे हैं कि किसी ने आपको कागज पकड़ा

दिए या आप कहीं पर जाकर मिले और इसने दे दिए आपको कागज वो दे

दिए। I just want to clarify कि अगर जो इतना आसान होता तो फिर इसमें

investigation की जरूरत ही नहीं है कि कोई आपको आकर आपकी झोली में कागज छोड़ कर

चला जाए। यह बहुत एक तरह से फिल्मी theory है।

journalism पत्रकारिता ऐसी नहीं होती है। मैं election commission दस साल

से cover कर रही हूं और यह I am sure दीप्तिमान भी मेरे साथ agree

करेंगे कि जो भी कोई beat reporter होता है वह बहुत समय बिताता

है एक beat को समझने में, उसको परखने में, लोगों से मिलने

जुलने में, उनका एक तरह से अपने काम के द्वारा

उनका विश्वास जीतने में। आप जब वह विश्वास जीतते

जब उन्हें लगता है कि आपका कोई agenda नहीं है, आप सिर्फ

तथ्यों पर काम करते हैं और यह एक तरह से Indian Express

की philosophy भी रही है कि हम facts पर काम करते हैं। तो जब

लोगों को वह विश्वास आ जाता है तो लोग थोड़ा सा आपसे धीरे

धीरे खुल कर बात करते हैं। तो खबरें रातों रात

नहीं निकलती हैं। कुछ निकल जाती होंगी। but इस तरह की खबरें

जहां पर हम लोगों को बताना चाह रहे हैं कि पिछले लगभग एक

साल में चुनाव आयोग में किस तरह का मतभेद है,

इस तरह की खबरें overnight नहीं मिलती हैं। So of course

a lot of it is a culmination of having covering having covered

a beat for almost ten years now।

but यह जरूर है कि हमें लगभग सात आठ महीने पहले

थोड़ा सा अनुमान लग चुका था कि

अ-चुनाव आयोग में तीनों commissioners के बीच में कुछ

मुद्दों पर मतभेद थी।

वह tip off मिलने के बाद of course हम लोगों ने लोगों से बात करनी

शुरू की। यह बातचीत लगभग कुछ महीने चलती रही। उस

बातचीत के आधार पर हमको इतना एक हमने ढांचा तैयार कर लिया गया कि

हमें पता लगा यह तीन से चार ऐसे अहम मुद्दे हैं जिन पर इन लोगों का

मैं क्या कहूं झगड़ा नहीं but कुछ अ-commissioners

नाखुश थे।

but हमारी investigation रफ्तार actually पिछले दो महीने में

पकड़ी कि जब हमारा ढांचा तैयार हो गया और also अगर जो किसी को कागज देने ही थे

तो हमें चार चार राज्यों में जाने की जरूरत नहीं थी। हमें

कुछ input मिले, कुछ कागज मिले उसके आधार पर हमने जाकर वह कई

हमको

कागज ground से भी जाकर मिले।

कहां कहां जाना पड़ा आपको?

हम लोग गए हैं हम of course Delhi में, Mumbai में, Goa

में और Kolkata। हमने चार शहरों में गए हैं over a

period of the last one month little over the last one month।

अ-and

again the short answer to your question is कि it didn't happen

overnight। It was obviously based on a tip off। tip off मिलने के

बाद हमने लोगों से बात की और फिर उसके बाद जो भी investigation

जो भी करता सबको पता है कि फिर आप ground पर जाते हैं, उसकी पुष्टि करने की कोशिश

करते हैं और सारे सबूत इकट्ठा करने की कोशिश करते

हैं।

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