Struggles of Students Seeking Jobs
अगर सोच लिए ना कि अगर नहीं नौकरी करना है, छोड़ देंगे।
लेकिन क्या करें, घर से बाहर ना नौकरी के नाम से ही घर से बाहर निकले हैं।
ये तकलीफ ना इसीलिए है। अगर घर से निकलते ना कि पापा जा रहे हैं कुछ करने के लिए,
तो शायद इतना तकलीफ ना होता।
लेकिन घर से निकले हैं बोलकर, सिविल सर्विस के लिए करेंगे पापा।
अरे, एज खत्म हो गया!
यही हिसाब होगा! यही सबका हिसाब होगा!
खून-खून के आंसू रोए हैं हम लोग! सारे स्टूडेंट्स इस एज में रोए हैं हम लोग!
नौकरी लेकर लोग क्या पताका फहराते हैं!
हम लोग नालायक थे क्या?
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