India's Economic Status and Challenges
यह है भारत के अमृत काल की असली तस्वीर। इसी महीने एक
जुलाई दो हज़ार छब्बीस को वर्ल्ड बैंक ने श्रीलंका, वियतनाम और
फिलीपींस को lower middle income देशों के group से निकाल कर
upper middle income देशों के group में रख दिया है। मतलब सीधा सा है कि World
Bank के according यह देश अमीर होते चले जा रहे हैं। World Bank के
according इन देशों की प्रति व्यक्ति आय बहुत बेहतर हुई है। जैसे कि
वियतनाम में एक आदमी एक साल में चार हज़ार नौ सौ सत्तर dollar यानी
कि चार लाख चौहत्तर हज़ार रुपए कमाता है। जबकि फिलीपींस की
per capita income चार हज़ार आठ सौ पचास dollar यानी कि चार लाख बासठ
हज़ार रुपए पहुंच। और श्रीलंका में एक आदमी एक साल में चार हज़ार छह
सौ सत्तर dollar यानी कि चार लाख पेंतालिस हज़ार रुपए कमाता है।
जबकि भारत की per capita income है अट्ठाईस सौ dollar यानी कि दो
लाख सड़सठ हज़ार रुपए एक साल में एक आदमी यहां कमाता है यानी कि बाईस
हज़ार रुपए महीना। और यह तो average income है जिसमें अडानी
और अंबानी की आय भी compensate हो जाती है। अगर असली per capita income
निकालेंगे तो हिंदुस्तान में सात, आठ, दस हज़ार रुपए से ज्यादा नहीं
निकलेगी। आप सोच के देखो श्रीलंका जैसा छोटा सा देश हमसे आगे निकल
गया। जबकि doctor मनमोहन सिंह के time तक हम खुद उसको आर्थिक मदद दिया
करते थे। आज उसकी per capita income India से लगभग दोगुना
हो चुकी है। जिस वियतनाम को कभी गरीबी और युद्ध का घर माना जाता था,
वह भी भारत से बहुत आगे निकल चुका है और फिलीपींस भी upper middle
income देशों के group में आ चुका है। लेकिन एक सौ चालीस करोड़ की
आबादी वाला यह विश्वगुरु देश पिछले बीस सालों से ही lower middle income देशों
के group में फंसा हुआ है। मनमोहन सिंह के रहते हुए उम्मीद थी कि
भारत जल्द ही upper middle income देशों के group में पहुंच जाएगा और फिर अमीर
देशों में चला जाएगा। लेकिन दो हज़ार चौदह में इस देश के लोगों ने अपने ही
पैर में कुल्हाड़ी मार ली और एक अनपढ़ आदमी एक चौथी फेल आदमी को इस देश का
प्रधानमंत्री बना दिया और आज उसके प्रधानमंत्री बनने के बारह
साल बाद भारत के अंदर के हालात देखिए। भारत की तो national per capita
income अट्ठाईस सौ dollar है। जबकि इंडिया में ही तमिलनाडु की per capita income
पैंसठ सौ dollar है और UP की चौदह सौ dollar और बिहार की सिर्फ
नौ सौ पचास dollar। यानी कि बिहार में एक आदमी एक साल में सिर्फ नब्बे
हज़ार रुपए कमाता है। यानी कि आठ हज़ार रुपए प्रति महीना के आसपास। अब
सोच के देखिए आठ हज़ार में वो क्या कमाता होगा, क्या खाता होगा, क्या बच्चों की
पढ़ाई करवाता होगा, क्या मां बाप का इलाज करवाता होगा। यानी
कि काम खत्म है। लेकिन इस देश का आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री इस देश को
पांच ट्रिलियन डॉलर की economy बनाने का जुमला पकड़ा कर अपने नाकारापन, अपने
निकम्मेपन को ढंकने की कोशिश करता रहता है। यह इनमें से कोई भी नहीं
बताता कि किसी भी देश के असली विकास का पैमाना GDP नहीं बल्कि
प्रति व्यक्ति आय होती है, रोजगार की उपलब्धता होती है। quality of
education, quality of health, quality of life इन सब पर depend
करता है अच्छा जीवन। एक बात तय है कि जब तक नरेंद्र मोदी जैसा अनपढ़
आदमी इस देश का प्रधानमंत्री रहेगा तब तक यह देश और पीछे ही चलता
चला जाएगा। इस देश को आगे ले जाना है या पीछे इस
देश की जनता को अब तय करना ही होगा। जय हिंद।
End of transcript · 600 words