गांधी बनाम सावरकर: प्रशांत किशोर ने तुलना को बताया गांधी का अपमान
और इस जनरेशन से या पूरे देश के लोगों से कोई सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
उन्होंने जो किया है वो इतिहास के पन्नों में अंकित है।
और उसको कोई व्यक्ति, कोई दल, कोई विचारधारा, कोई ग्रुप ना बढ़ा सकता है ना घटा सकता है।
गांधी बनाम सावरकर, प्रशांत किशोर कहाँ खड़े हैं?
ये सवाल ही बेमानी है, बिलकुल गांधी।
गांधी बनाम सावरकर, ये सवाल पूछकर आप गांधी का अपमान कर रहे हैं।
प्रशांत जी, मैं...
आप एक शब्द में, एक ही लाइन में, आप गांधी और सावरकर को बराबर कर रहे हैं?
बिलकुल नहीं।
आप नहीं कर रहे हैं ना? तो काहे सवाल पूछ रहे हैं ये?
बहुत सारे पॉलिटिकल...
ये टीआरपी के लिए।
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