Discussion on Ayodhya and Ram Janmabhoomi
नहीं गई। आज अयोध्या के अंदर सब कुछ देखने
को मिला है। अब हमारे संतगण कोई जाता है देश के अंदर,
दुनिया के अंदर कोई जाता है तो अब कोई उनको चिढ़ाता नहीं, कोई उन
पर टिप्पणी नहीं करता है। अयोध्या का नाम सुन
करके कोई व्यक्ति दस कदम दूर भी होगा तो इनके
पैर, पैर पड़ने के लिए वह वहां से दूरी तय करके
आकर के सम्मान देता है।
यह है
इन पूज्य संतों के
तप और साधना का परिणाम। श्री
राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उन पूज्य संतों ने जो
संघर्ष किया,
सम-विषम परिस्थितियों में जिन चुनौतियों से जूझ रहे थे
वह अकल्पनीय थी। कोई उसकी कल्पना नहीं कर सकता
था। किस प्रकार की विषम परिस्थितियां
थी। उन स्थितियों में और संघर्ष हुआ
था। लेकिन यह हम
सब हिंदुओं की त्रासदी है
कि जब
अयोध्या में
प्रभु का
राजतिलक होना है
तब उन्हें बनवास दे दिया जाता है। क्योंकि कोई
ना कोई मंथरा आकर के फिर कुछ ना कुछ
गुल खिलाने का काम करने लगती है। और यही
कुछ अयोध्या के साथ फिर से हो रहा है। अयोध्या धाम
पर निशाना साध करके इसी बहाने
केवल अयोध्या को नहीं,
केवल राम जन्मभूमि को नहीं,
सनातन धर्म फिर से एक बार विधर्मियों के
निशाने पर है और चेहरे वही
हैं, जिन्होंने कभी
1947 में मौन साध लिया था। जो
कभी बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं के
कत्लेआम पर मौन साध लेते हैं। और यह वही लोग
हैं जो आज
राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान
राम भक्तों के विरोध में अस्त्र शस्त्र के साथ
खड़े होकर के उन पर लाठी और गोली का प्रहार
करने में संकोच नहीं करते थे। यह वही लोग
हैं जो राम जन्मभूमि आंदोलन के खिलाफ
उच्चतम न्यायालय में
अपनी पूरी टीम खड़ी करके पूरे,
फैसला राम जन्मभूमि के पक्ष में न आने
पाए इसके लिए पूरी एड़ी चोटी लगा लेते
हैं। यह वही लोग हैं। आज वे
राम राम जपते हुए कालनेमी के रूप में फिर बहकाने का प्रयास
कर रहे हैं। बहनों और भाइयों
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