Discussion on Democracy and Parliament Reforms
ये अच्छी बात नहीं है, ये डेमोक्रेसी के लिए भी एकदम हेल्दी साइन नहीं है।
विपक्ष पहले बोल रही थी कि धर्मेंद्र प्रधान जी इस्तीफा देंगे तो उसके बाद हम चर्चा करेंगे,
इस्तीफा उन्होंने दे दिया।
उसके बाद भी वो चर्चा करने से नाराज़ हैं।
हर दिन डिसरप्शन हो रहा है।
पार्लियामेंट सदन का हर दिन, हर मिनट बहुत कीमती होता है,
टैक्सपेयर के पैसे इसमें जुड़े रहते हैं।
तो मुझे लगता है कि देश के युवा और छात्र-छात्राओं को भी जानना चाहिए
कि इस नए बिल में क्या आ रहा है, क्या-क्या रिफॉर्म्स हम लोग एड्रेस करना चाहते हैं।
विपक्ष आलोचना करे, डिस्कस करे, कंस्ट्रक्टिव डिबेट हो।
उनके भी अगर कोई सुझाव हो तो वो दें,
संसद और सदन और सरकार उसका अमल करे।
हेल्दी डेमोक्रेसी की वही छवि होनी चाहिए।
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