Controversy Surrounding Neha Bora and AISA
आज नेहा बोरा राहुल गांधी के साथ नजर आई। कोई हर्ज नहीं
है। कोई भी किसी के साथ हो सकता है। हालांकि नेहा बोरा बीजेपी के साथ भी दिखती हैं,
आम आदमी पार्टी के साथ भी दिखती हैं कांग्रेस के साथ भी। मुझे उसमें कोई एतराज
नहीं
है। लेकिन नेहा बोरा किस संस्था की है, आपको मालूम होगा। मेरे दर्शकों
को नहीं मालूम तो आज मैं आपको बताना चाहता हूं।
यह आइसा नाम के एक संस्थान जो संस्था है उसकी सदस्य है। यह
आइसा क्या है, इसका असली चेहरा देश को समझना चाहिए। यह
मेरे पास खबर है।
उन्नीस सितंबर दो हज़ार पच्चीस। बाटला हाउस एनकाउंटर के सत्रह
साल बाद यह आइसा ने जो बाटला हाउस एनकाउंटर
में दो आतंकवादी मारे गए थे, दो आतंकवादी। उन दो
आतंकवादियों के समर्थन में जुलूस निकाला था नेहा बोरा की
संस्था ने। दो आतंकवादियों के समर्थन में इनके पोस्टर पर जानते हैं क्या लिखा
है। वी डिमांड जस्टिस फॉर आतिफ एंड साजिद। जस्टिस
फॉर आतिफ एंड साजिद। अब मैं आपको आतिफ और साजिद को जिनके
लिए नेहा बोरा का आइसा जो है जस्टिस मांग रहा था उन आतिफ
और मैं साजिद का भी आपको बता देता हूं इतिहास। यह जो दोनों
मोहम्मद साजिद ये इंडियन मुजाहिदीन का ये
terrorist, ये उनका terrorist है। दूसरा जो आतिफ
है वो भी इंडियन मुजाहिदीन का एक terrorist है। दिल्ली सहित
दिल्ली सहित वाराणसी, जयपुर में बम धमाके जिसमें तीस से ज्यादा
लोग मारे गए थे। आतिफ और साजिद का इन दोनों में दोनों
बम धमाकों में सीरियल बम ब्लास्ट में जिसमें तीस से ज्यादा लोग मारे गए।
इन आतंकवादियों का उसमें हाथ था और इसलिए बाटला हाउस एनकाउंटर में
इन्होंने इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा का की जान ले ली।
लेकिन नेहा के संस्था ने मोहनचंद शर्मा के लिए जस्टिस की
मांग नहीं की। इन्होंने आतंकवादियों के लिए जस्टिस की मांग की। दंतेवाड़ा
में छिहत्तर सीआरपीएफ के जवान मारे गए थे और जेएनयू के
अंदर इन जवानों के मारे जाने पर जश्न मनाया गया। और
जानते हैं जश्न किसने मनाया। जश्न मनाने वाले दो संस्था थे
डीएसयू और आइसा। नेहा बोरा की संस्था आइसा। भारत में
नक्सली छिहत्तर आतंकवादियों को मार देते हैं और ये लोग उसका जश्न
मनाते हैं, पार्टी करते हैं।
End of transcript · 365 words