Call for Educational Protest on July 20
नमस्ते साथियों।
बड़ी मुश्किल से आज फिर आप लोगों से जुड़ पा रहा हूँ, अठारहवें दिन।
क्योंकि आप लोगों के हज़ारों संदेश आए
कि मैं अनशन तोड़ दूँ, कुछ खा लूँ।
बड़े बुजुर्ग, नेतागण आकर मुझे
कोई प्यार से, कोई गुस्से में बोल रहे हैं।
और कुछ ने तो अदालत से अपील की है
कि सरकार मुझे ज़बरदस्ती खाना खिलाए।
दो बातें हैं। पहला तो अगर मैं खा भी लूँ,
तो उससे क्या बदल जाएगा और क्या संदेश जाएगा?
सरकार को तो यही संदेश जाएगा
कि जवाबदेही की ज़रूरत नहीं है, वो बैठ जाते हैं, वो चले जाते हैं।
और दूसरी बात,
मेरी हालत कुछ ऐसी भी नहीं है कि मैं दो-चार दिन में मर जाऊँ।
बहुत सारे मेडिकल टेस्ट होते रहे हैं।
रिज़ल्ट्स काफी नॉर्मल हैं अठारह दिन के अनशन के लिए।
आज ईसीजी भी हुआ, बुरा नहीं है।
तो इसलिए मैं अभी कई दिन चल सकता हूँ।
हाँ, कमज़ोरी है, मेरे मसल्स ख़त्म हो रहे हैं,
मगर मेरा दिल और कोर अभी भी ठीक चल रहा है।
तो इसलिए सिर्फ़ अनशन तोड़ने को कहने के बजाय,
मैं आप लोगों से विनती करूँगा कि आप भी एक छोटा कदम उठाएँ।
20 जुलाई को इतनी बड़ी संख्या में आएँ कि एक संदेश सरकार को जाए।
और मैं तो कहूँगा उस दिन सारे स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों से
कि वो उसे एक्सपीरियंशियल एजुकेशन का दिन मनाएँ
एनईपी के अंतर्गत, न्यू पॉलिसी ऑन एजुकेशन के अंतर्गत।
क्योंकि उस दिन बच्चे अभ्यास कर पाएँगे
पॉलिटिकल साइंस का एक अनोखा लेसन
जो कि इतिहास का हिस्सा होगा जिसमें वो खुद शिरकत हो पाएँगे
और सीख पाएँगे कैसे लोकतंत्र चलता है जनता की ओर से भी।
तो 20 जुलाई को बहुत से सांसदों के साथ आप सब आइए
हज़ारों की संख्या में, हम सब मिलके इस मुद्दे को संसद के हवाले करेंगे।
तो मुझे भी भरोसा होगा कि अब ये सही हाथों में गया है।
उससे पहले भी आप कुछ कर सकते हैं, वो ये कि आप
इस नंबर पर मिस्ड कॉल देकर बता सकते हैं कि आप आ रहे हैं
और इस वेबसाइट पर भी अपना नाम रजिस्टर कर सकते हैं।
इतना तो आप ज़रूर करेंगे, हमारी उम्मीद है। जय हिंद।
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