Discussion on Halala Centers in Pakistan
यहां क्या करते हैं? कहते हैं दो लाख रुपये दो हलाला लग रहा है।
यह कौन सी जगह है?
अगले दिन दो दिन बाद बीवी वापस।
कराची, बहावलपुर, इस्लामाबाद यहां पर हलाला सेंटर बने
हुए हैं। एक हमारी जो है YouTuber बहन
हमारी, साहिफी उसने call की एक हलाला सेंटर पर live
और call करके
recording हो रही है सारी। कहा जी हां जी हलाला सेंटर?
जी हलाला सेंटर। यह बहावलपुर का था।
जी हलाला सेंटर है और ऐसे ऐसे करना है। कितना rate है जी?
दो लाख। अच्छा ठीक है। ठीक है दो लाख आपको दे दें। मतलब safe, secure है
ना। कोई मसला नहीं। नहीं नहीं मसला ही कोई नहीं। इधर से निकाह करें, रात ठहरें, अगले
दिन ले जाएं। हमारा तो business है यह। अब मुझे बताएं कि हम
इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान में
हलाले के नाम पर centers खोल के कमाई कर रहे हैं। किसकी गर्दन पकड़ें?
किससे सवाल करें? किधर हैं हमारे ठेकेदार जो
इस मुल्क को सियासी बुनियादों पर भी संभाल के बैठे हैं
और इस्लामिक बुनियादों पर भी संभाल के बैठे हैं, जिनसे हम सीखते हैं। इस
पर किसी ने आवाज उठाई? किसी higher level पर आप मुझे बताएं,
मैंने तो नहीं सुना।
उठाई भी होगी तो इसी तरह मैंने, आपने, इसी ने, इसी ने,
किसी ने आवाज उठा ली। भाई जिनके
हाथों में इख्तियारात है, जिनकी कलम में power है,
उन्होंने आवाज उठाई?
बिल्कुल नहीं उठाई। आज यह हो रहा है तो कल इससे अगला step होगा।
अच्छा मैंने सुना है मेरे एक मेहमान थे KPK का। वो बताते हैं कि KPK
में तलाक के मामलात ज्यादा होते हैं तो हलाला करवाने के लिए
भाई या बाप के साथ निकाह करवाये जाते हैं। यह मेरे सुनने में आया है। यह उनके वो
बोल है।
अल्लाह हु अकबर! यही कह सकती हूं। मैं क्या कहूं इस पर?
यह तो सुना था कि शौहर अगर मर जाए
तो जी क्या है जी? देवर जेठ ये कहते हैं कि हमारे घर की इज्जत
है, हमारे भाई की बीवी
थी, बच्चे हैं। इन बच्चों को संभालेंगे भी हम,
हम निकाह करते हैं। बड़ी अच्छी बात
है। एक positive response है, जो कि मुश्किल है लेकिन है। लेकिन
शौहर यह कह रहा है कि यार तू मेरी छोटी भाई से, मेरे छोटे भाई से इसकी शादी कर दो,
निकाह कर दो हलाला के लिए।
मैं तो कहती हूं पूरे खानदान को खड़ा करें, side पे करें इनको। ऐसे बंदे को रहने का
जिंदा हक ही कोई नहीं है जो अपनी बीवी को तकसीम करने पर तैयार हो जाए।
देखिए सीधी सी बात है। मेरे लफ्ज जरूर सख्त हैं लेकिन हकीकत यह है कि आप अपनी
जुबान को लगाम दें।
कराची का एक case मुझे याद है। मैंने बाकायदा एक video देखी। Think Crime जो
है उन्होंने video बनाई। उस video के मुताबिक, उस video में जो report किया
गया कि एक शौहर ने अपनी बीवी को तलाक दी गुस्से में,
जज्बाती होकर। उसके बाद जब उसे एहसास हुआ कि नहीं गलती हो गई, वो
पछताया। उसने अपने भाई के साथ निकाह करवा दिया। जब वो
दोनों निकाह के बाद गए, बंदा बर्दाश्त नहीं कर सका। उसे heart
attack आ गई, उसकी
मौत हो गई।
अब मेरी बात से बहुत गुस्सा आएगा। वो मौत, वो attack जो है
ना काश वो पहले ही हो जाता जब मार पीट रहा था बीवी को या जब तलाक दे रहा था
बीवी को। शायद दूसरे attack की तो उम्मीद होती है ना कि इंसान तीन attack बर्दाश्त कर
लेता है। मैं कहती हूं ये attack पहले ही हो जाता ताकि ना उसकी इज्जत तार तार होती,
ना इसका तमाशा बनता, ना हम आज इसको खबर के तौर पर report कर रहे
होते। Once again गुस्सा आया है, पानी पियो, आउजुबिल्लाह
पढ़ो। भाई अल्लाह ने यही कहा है। यह थोड़ी ना अल्लाह ने कहा है कि तलाक दो, तो बंदे
फारिग करो, तो गोलियां मारो, तो बाद में याद ओहो शैतान आ गया,
गलती हो गई।
पहले नहीं आंखें खोलनी है जब सब कुछ लुट जाएगा, फिर आंखें खोलनी है और फिर
दिल पकड़ लेनी है अपने। हाय मेरी बीवी ले गया।
अगली story की तरफ चलते हैं।
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