Gandhi's Contribution to India's Freedom
गांधी की कोई बात अगर आपको अच्छी नहीं लगती है तो यह समझिए कि
आपने उस बात को समझने की अभी समझ develop नहीं की है।
उस आदमी ने जो कुछ भी कहा
वो सही कहा होगा। मैं कम से कम ऐसा मानता हूं। मेरा अपना
experience है
कि गांधी ने जो कहा, अगर आप उसको गलत समझ रहे हैं या समझ रहे हैं
कि यार
ये आदमी ने क्या बेवकूफी वाली बात कह दी तो समझिए कि आपको वो समझ
उस चीज को समझने की अभी develop नहीं हुई है।
बहस होता है कि गांधी का देश की आजादी में कितना योगदान है। कुछ
लोग ये भी बताते हैं अरे नहीं वो तो घर दल वालों ने किया, लड़ाई
लड़ी। मैं आपको बता रहा हूं कि जो लोग इस तरह की बात में
पड़ते हैं, उनको गांधी का कोई समझ नहीं है। गांधी जी का
योगदान यह नहीं कि देश
आजाद हुआ। भारत के साथ बहुत सारे देश आजाद हुए। मेरी समझ से गांधी जी का
सबसे बड़ा योगदान यह है कि जिस तरीके से उन्होंने भारत के लोगों को
तैयार कराया आजादी के लिए ताकि जब आजादी मिली तो हम लोगों
ने आजादी को कभी अपने हाथ से गंवाया नहीं। आप पूरे
दुनिया का इतिहास उठाकर देखिए। जो भी देश आजाद हुए उन्नीस सौ चालीस
के बाद उन्नीस सौ साठ के बीच में शायद ही कोई ऐसा देश है जहां लोकतंत्र
को चुनौती नहीं मिली। जहां सत्ता किसी ने military ने या दूसरे ने
हथियाया नहीं। बड़े बड़े नेता चाहे वो Egypt हो,
Tanzania हो, Kenya हो, वो सब नेहरू और पटेल जैसे leader
उन राष्ट्रों में भी थे। हर जगह सत्ता लोकतंत्र compromise
हुआ। भारत में कभी लोकतंत्र पर आंच नहीं आई इसलिए कि ये
गांधी का contribution था। इतनी deep rooted उन्होंने value
system लोकतांत्रिक value system बना दी थी और इतने उसके leader
बना दिए थे कि कोई चाहकर भी उसको hijack नहीं कर पाया।
लोग कहते हैं कि अरे सुभाष चंद्र बोस होते तो ये हो जाता, पटेल
होते तो ये हो जाता। उस आदमी ने क्यों नेहरू को चुना?
मैं कोई नेहरू का fan हूं, ऐसी बात नहीं है। लेकिन उसका एक rational
आपको
समझ में आएगा। और गांधी को पढ़िए। इसमें कहीं कोई दो
मत नहीं है। उससे बेहतर कोई human being यहां पैदा हुआ नहीं
धरती पर।
चर्चिल को कोफ्त थी गांधी से। Google करिएगा Round Table Conference लंदन
की देखिएगा। वहां वो सारे बैठे हुए हैं सूट ही नहीं गर्म
सूट पहन करके। उनके बीच में एक ही आकर बैठ गए। एक नंगे
आदमी ने बाकी सब में हीन भावना भर दी।
कहा ठंड नहीं लग रही। और ये एक moral weapon है जिसका उन्होंने इस्तेमाल
कर दिया है। कह रहे मैं भारत हूं, मैं अकेला हूं। मेरे पास
संख्या नहीं है। मेरे पास पैसा भी नहीं है। लेकिन देखो मेरे सामने तुम सब लज्जित
हो। जो बात देख रहे हो, साफ साफ कह रहे हैं। कोई लाग लपेट नहीं।
और इतना मैं बता देता हूं वो जीवित हो और आज यहां आ जाएं, इसी मंच
पर आ जाएं, इसी कुर्सी पर बैठ जाएं। आज भी आप उन्हें
मंत्रमुग्ध होकर
सुनेंगे। दम था बंदे में। हल्का आदमी नहीं था
वो।
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